UP: रिसिया इलाके के पटेल नगर गांव की रहने वाली नैना ने अपनी हिम्मत और मेहनत से दुनिया को दिखा दिया कि गरीबी पढ़ाई में बाधा नहीं बन सकती। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने खेतों में मजदूरी की और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया ताकि
UP: रिसिया इलाके के पटेल नगर गांव की रहने वाली नैना ने अपनी हिम्मत और मेहनत से दुनिया को दिखा दिया कि गरीबी पढ़ाई में बाधा नहीं बन सकती। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने खेतों में मजदूरी की और बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया ताकि अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। उनकी इसी संघर्ष भरी कहानी और समाज के लिए किए जा रहे काम की वजह से उन्हें लंदन में सम्मानित किया गया है।
नैना ने कैसे किया पढ़ाई और संघर्ष का सामना
नैना के पिता विजय बहादुर राजगीर मिस्त्री हैं और मां सोना देवी गृहणी हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, जिससे उनकी पढ़ाई कई बार रुकने की कगार पर पहुंची। लेकिन पढ़ने की ललक इतनी ज्यादा थी कि उन्होंने गांव में मजदूरी करना स्वीकार किया। उन्होंने छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर अपनी किताबों और पढ़ाई का खर्च निकाला।
प्रोजेक्ट लहर और समाज सेवा में योगदान
नैना आगा खान फाउंडेशन के ‘प्रोजेक्ट लहर’ से जुड़ीं, जिसने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की। आज वह खुद पढ़-लिखकर अन्य किशोरियों को शिक्षा के लिए प्रेरित कर रही हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा रही हैं। इसके अलावा, वह गांव में बाल विवाह जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए अभियान भी चला रही हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
नैना को लंदन में सम्मान क्यों मिला?
नैना ने बेहद गरीबी और आर्थिक तंगी के बावजूद खेतों में मजदूरी और ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई पूरी की। उनके इसी संघर्ष और अब अन्य लड़कियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए उन्हें लंदन में सम्मानित किया गया।
नैना वर्तमान में समाज के लिए क्या काम कर रही हैं?
नैना किशोरियों को शिक्षा के प्रति जागरूक कर रही हैं ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें। साथ ही वह अपने गांव में बाल विवाह को रोकने के लिए अभियान चला रही हैं।