UP की ‘मोगली गर्ल’ एहसास का निधन, लखनऊ के अस्पताल में ली अंतिम सांस

UP/Lucknow: बहराइच के जंगलों में जानवरों की तरह मिली ‘मोगली गर्ल’ एहसास अब इस दुनिया में नहीं रही। 18 वर्ष की आयु में लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में उसने अंतिम सांस ली। वह पिछले काफी सम

UP/Lucknow: बहराइच के जंगलों में जानवरों की तरह मिली ‘मोगली गर्ल’ एहसास अब इस दुनिया में नहीं रही। 18 वर्ष की आयु में लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में उसने अंतिम सांस ली। वह पिछले काफी समय से निर्वाण संस्था में रह रही थी और फेफड़ों में संक्रमण के कारण उसकी तबीयत बिगड़ी थी।

एहसास को जनवरी 2017 में बहराइच के कतर्नियाघाट वन्यजीव अभयारण्य के मोतीपुर रेंज में भटकते हुए पाया गया था। जब वह मिली थी तब वह इंसानों से डरती थी और कपड़ों से परहेज करती थी। वह चारों हाथ-पैरों पर चलती थी और जानवरों जैसी आवाजें निकालती थी। शुरुआत में चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, बहराइच ने उसका नाम ‘पूजा’ रखा था, लेकिन बाद में लखनऊ की निर्वाण संस्था में उसे ‘एहसास’ नाम दिया गया।

निर्वाण फाउंडेशन के अध्यक्ष सुरेश सिंह धपोला और उसकी देखभाल करने वाली रानी ने बताया कि एहसास ने अपना ज्यादातर समय इसी संस्था में बिताया। रानी, जिसे एहसास ‘अम्मा’ कहती थी, ने उसके निधन पर गहरा दुख जताया है। डॉक्टरों के अनुसार, एहसास का मस्तिष्क पूरी तरह विकसित नहीं था, जिसकी वजह से वह बौद्धिक रूप से अक्षम थी और उसे अक्सर मिर्गी के दौरे पड़ते थे।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि फेफड़ों की बीमारी की वजह से उसे सेप्टीसीमिया यानी रक्त संक्रमण हो गया था, जो उसकी मृत्यु का मुख्य कारण बना। हालांकि कुछ जानकारों का मानना था कि वह शायद परिवार द्वारा जंगल के पास छोड़ी गई होगी, लेकिन उसकी आदतों और व्यवहार ने उसे दुनिया भर में ‘मोगली गर्ल’ के रूप में मशहूर कर दिया था।