UP में सबसे महंगा एक्सप्रेसवे 24 दिन में ही धंसा, 84 जगहों पर दिखी दरारें; NHAI ने टोल वसूली रोकी
UP/Lucknow: उत्तर प्रदेश का सबसे महंगा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद विवादों में घिर गया है। 13 जुलाई 2026 को शुरू हुए इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की हालत इतनी खराब हो गई कि महज 24 दिनों के भीतर
UP/Lucknow: उत्तर प्रदेश का सबसे महंगा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद विवादों में घिर गया है। 13 जुलाई 2026 को शुरू हुए इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की हालत इतनी खराब हो गई कि महज 24 दिनों के भीतर ही सड़क 84 जगहों पर धंस गई। इस एक्सप्रेसवे को बनाने में करीब 4,700 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
इस सड़क का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। उद्घाटन के समय नितिन गडकरी ने कहा था कि यूपी के हाईवे अमेरिका के बराबर होंगे, लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली। सबसे पहले 26 जुलाई को उन्नाव के बेगमखेड़ा में सड़क धंसी थी, जिसके बाद 30 और 31 जुलाई को भी ऐसी ही खबरें आईं। 5 अगस्त तक की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रीन फील्ड हिस्से के 45 किलोमीटर के दायरे में 40 से ज्यादा जगहों पर पैचवर्क करना पड़ा।
खराब निर्माण को देखते हुए NHAI ने अब कड़े कदम उठाए हैं। मरम्मत का काम पूरा होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली बंद कर दी गई है। निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड को ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हुई है, जिससे कंपनी भविष्य में NHAI के प्रोजेक्ट्स में बोली नहीं लगा पाएगी। साथ ही कंपनी पर 2% जुर्माना लगाने और जिम्मेदार कर्मचारियों को हटाने का प्रस्ताव दिया गया है। मरम्मत में लगने वाले करीब 3 करोड़ रुपये का खर्च भी PNC इंफ्राटेक को ही उठाना होगा।
प्रशासन ने इस मामले में अधिकारियों पर भी गाज गिराई है। परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा को वापस उनके विभाग भेज दिया गया है और पूर्व पीडी सौरभ चौरसिया के खिलाफ चार्जशीट तैयार की जा रही है। तीन इंजीनियरों को भी प्रोजेक्ट से हटा दिया गया है। अब IIT खड़गपुर इस एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की लेजर जांच करेगा।
इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार के आरोप भी लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि PNC इंफ्राटेक लिमिटेड भाजपा राज्यसभा सांसद नवीन कुमार जैन के भाई प्रदीप कुमार जैन की कंपनी है। आरोप यह भी है कि कंपनी को ‘नॉन-परफॉर्मर’ माने जाने के बावजूद 16 जुलाई 2026 को 3,483 करोड़ रुपये का एक नया ठेका दिया गया, जिस पर NHAI ने अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है।