UP के लखनऊ और गोंडा में नकली दवाओं का बड़ा नेटवर्क ध्वस्त, राजस्थान से हो रही थी सप्लाई
UP/Lucknow: लखनऊ और गोंडा में नकली दवाओं के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर करोड़ों रुपये की संदिग्ध और नशीली दवाएं जब्त की हैं। जांच में पता
UP/Lucknow: लखनऊ और गोंडा में नकली दवाओं के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर करोड़ों रुपये की संदिग्ध और नशीली दवाएं जब्त की हैं। जांच में पता चला है कि यह पूरा सिंडिकेट राजस्थान से जुड़ा हुआ था, जहां से उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में नकली दवाएं भेजी जा रही थीं।
इस कार्रवाई की शुरुआत 8 और 9 जुलाई को लखनऊ के अमीनाबाद और बख्शी का तालाब (BKT) में हुई छापेमारी से हुई थी। इसके बाद 16 जुलाई को बीकेटी में एक वैन से नकली दवाएं पकड़ी गईं, जिससे पुलिस को गोंडा के कनेक्शन का पता चला। इसके बाद 16 से 18 जुलाई के बीच गोंडा में अवैध गोदामों पर छापेमारी की गई।
बरामदगी की बात करें तो लखनऊ के अमीनाबाद से 21 लाख और बीकेटी से 3 लाख रुपये की दवाएं मिलीं। वहीं गोंडा से करीब 1.13 करोड़ रुपये की नकली और नशीली दवाएं बरामद हुई हैं। पकड़ी गई दवाओं में गैस, बीपी, दर्द, सूजन और एंग्जायटी की नकली दवाओं के साथ-साथ कोडीन फॉस्फेट सिरप, ट्रामाडोल इंजेक्शन और अल्प्राजोलम टैबलेट जैसी नशीली दवाएं शामिल हैं।
FSDA आयुक्त डॉ. रोशन जैकब और सहायक आयुक्त बृजेश कुमार ने बताया कि इस नेटवर्क का मुख्य सरगना राजस्थान का रहने वाला भूपेंद्र शर्मा और गुर्जर है। पुलिस ने गोंडा से शिवम कसौधन, लखनऊ से भूपेंद्र सिंह, आलमबाग से विमल कुमार सिंह और वाराणसी से संदीप श्रीवास्तव को गिरफ्तार किया है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल बरामदगी (लखनऊ) | 24 लाख रुपये |
| कुल बरामदगी (गोंडा) | 1.13 करोड़ रुपये |
| मुख्य सरगना | भूपेंद्र शर्मा और गुर्जर (राजस्थान) |
| जांच के लिए भेजे गए नमूने | लखनऊ (27) और गोंडा (19) |
| लागू धाराएं | BNS 111, 318(4), 319(2), 276 और NDPS एक्ट |
अधिकारियों ने बताया कि कई दवाओं के लेबल पर स्पेलिंग और प्रिंटिंग गलत थी, जिससे उनके नकली होने का पता चला। यह सारा खेल बिना लाइसेंस और बिना बिल के चलाया जा रहा था। विभाग ने आम जनता से अपील की है कि अगर किसी दवा की पैकिंग, प्रिंटिंग या कीमत पर शक हो, तो उसे न खरीदें और तुरंत पुलिस या विभाग को सूचना दें।