UP में लखनऊ अग्निकांड के बाद सख्त हुए नियम, बिना फायर ऑडिट नहीं मिलेगा बिजली कनेक्शन और ट्रेड लाइसेंस
UP/Lucknow: लखनऊ के अलीगंज में एक व्यावसायिक इमारत में लगी आग ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे। अब सरकार ने इस घटना से सबक लेते हुए पूरे राज्य में बिजली सुरक्
UP/Lucknow: लखनऊ के अलीगंज में एक व्यावसायिक इमारत में लगी आग ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे। अब सरकार ने इस घटना से सबक लेते हुए पूरे राज्य में बिजली सुरक्षा और बिल्डिंग नियमों को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं न हों।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि राज्य में अब बिजली सुरक्षा और बिल्डिंग नियमों का पालन सख्ती से कराया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे राज्य के लिए एक बड़ा सबक बताते हुए सभी बड़े और व्यावसायिक भवनों के लिए फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य कर दिया है। अब किसी भी कमर्शियल बिल्डिंग को बिना फायर एनओसी और ऑडिट के नया बिजली कनेक्शन या व्यापार लाइसेंस नहीं दिया जाएगा।
सरकार ने साफ किया है कि अस्पतालों, नर्सिंग होम, कोचिंग संस्थानों और शॉपिंग मॉल जैसे संवेदनशील स्थानों का बारीकी से निरीक्षण होगा। बेसमेंट का इस्तेमाल किसी भी व्यावसायिक काम के लिए करना अब पूरी तरह मना है। इसके अलावा, इमारतों का उपयोग केवल उसी काम के लिए होगा जिसके लिए जमीन स्वीकृत की गई है। यदि किसी इमारत में बिजली का लोड तय सीमा से ज्यादा पाया गया, तो तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
| जांच रिपोर्ट के मुख्य खुलासे | विवरण |
|---|---|
| मौत का कारण | आग की लपटों के बजाय धुएं से दम घुटने के कारण 15 मौतें हुईं |
| आग की वजह | एसी कंप्रेसर के गर्म होकर फटने और वेंटिलेशन की कमी से आग लगी |
| बिजली लोड | स्वीकृत 20 किलोवाट के बजाय 34 किलोवाट बिजली का उपयोग हो रहा था |
| बिल्डिंग नियम | आवासीय उद्देश्य के लिए बनी इमारत का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था |
| सुरक्षा खामी | इमारत में आपातकालीन निकास (Emergency Exit) की कमी और फर्जी एनओसी मिली |
| प्रशासनिक कार्रवाई | लापरवाही के लिए एक कार्यकारी अभियंता और एक प्रभारी अधिकारी निलंबित |
आवास एवं नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव गुरुप्रसाद ने सभी विकास प्राधिकरणों को इन नियमों को तुरंत लागू करने को कहा है। अगर किसी इमारत में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलता है, तो संबंधित प्रवर्तन अधिकारी की जिम्मेदारी तय होगी और उन पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस काम के लिए सभी जिलों में विशेष टास्क फोर्स बनाई जाएगी। उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तराखंड सरकार ने भी अपने राज्य के अस्पतालों और कोचिंग सेंटरों का फायर ऑडिट कराने का फैसला किया है।