UP में फीस वापस लेने के लिए वकील के खाते को कराया फ्रीज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साइबर सेल को लगाई फटकार
UP/Lucknow: लखनऊ के एक वकील के बैंक खाते को फीस वापस लेने के मकसद से साइबर फ्रॉड की झूठी शिकायत कर फ्रीज करा दिया गया। इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी वकील को मिली प्रोफेशनल फीस को
UP/Lucknow: लखनऊ के एक वकील के बैंक खाते को फीस वापस लेने के मकसद से साइबर फ्रॉड की झूठी शिकायत कर फ्रीज करा दिया गया। इस मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी वकील को मिली प्रोफेशनल फीस को तब तक अपराध की कमाई नहीं माना जा सकता जब तक कि वह खुद किसी गलत काम में शामिल न हो।
मामला आयुष बाजपेयी नाम के एक वकील से जुड़ा है। उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर कर बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर सेल के कहने पर उनका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया था। वकील का कहना है कि उनके खाते में जो पैसा आया था, वह उनके क्लाइंट द्वारा दी गई प्रोफेशनल फीस थी।
1 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की पीठ ने इस बात पर आपत्ति जताई कि कुछ लेन-देन के शक में पूरे खाते को फ्रीज कर दिया गया। कोर्ट ने साफ किया कि वकील को अपनी फीस पाने का पूरा हक है, चाहे क्लाइंट की कानूनी स्थिति कुछ भी हो। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है कि पुलिस ऐसी जब्ती को कैसे कंट्रोल करेगी ताकि न्याय के काम में रुकावट न आए।
खातों को फ्रीज और अनफ्रीज करने को लेकर कुछ जरूरी नियम और जानकारी नीचे दी गई है:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| नई SOP (अप्रैल 2026) | अनजाने में साइबर फ्रॉड का पैसा आने पर 90 दिनों में खाता अनफ्रीज होगा, बशर्ते खाताधारक अपराधी न हो। |
| हाईकोर्ट की टिप्पणी (मई 2026) | बैंक जांच एजेंसी नहीं बल्कि एक ट्रस्टी की तरह काम करते हैं, मनमाने तरीके से खाता फ्रीज न करें। |
| सुप्रीम कोर्ट का रुख | डिजिटल धोखाधड़ी को डकैती और लूट जैसा बताया और मुआवजे के लिए ढांचा तैयार करने को कहा। |
इस तरह के मामले अब बढ़ रहे हैं। हाल ही में 29 जून 2026 को गौहाटी हाईकोर्ट ने भी एक वकील के खाते को आंशिक रूप से चलाने की अनुमति दी थी। वहीं 30 जून को बिलासपुर में एक वकील का मोबाइल हैक होने से 1.42 लाख रुपये निकाले जाने की घटना भी सामने आई थी।