UP में एक्सप्रेस-वे की हालत खराब, उद्घाटन के एक महीने बाद ही धंसी कानपुर-लखनऊ सड़क; NHAI ने कंपनी को किया ब्लैकलिस्ट

UP : कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। 4200 करोड़ की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को हुआ था, लेकिन महज एक महीने के भीतर ही सड़क जगह-जगह से धंसने लगी है।

UP : कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर सफर करने वालों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। 4200 करोड़ की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को हुआ था, लेकिन महज एक महीने के भीतर ही सड़क जगह-जगह से धंसने लगी है। हालत यह है कि 45 किलोमीटर के दायरे में हर दो किलोमीटर पर गड्ढे और दरारें नजर आ रही हैं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

ताजा जानकारी के मुताबिक, 11 अगस्त 2026 तक तीन और जगहों पर सड़क धंसी है। सिर्फ सड़क ही नहीं, बल्कि डिवाइडर, पुलिया और पब्लिक कॉलिंग बूथ भी टूट चुके हैं। 10 अगस्त को हुई एक घंटे की बारिश ने एक्सप्रेस-वे के ड्रेनेज सिस्टम की पोल खोल दी, जिससे सड़क पर पानी भर गया और वाहनों को गलत साइड से निकलना पड़ा। किलोमीटर 29.9 से 30.7 तक की तीनों लेन पूरी तरह बंद रहीं।

इस मामले में NHAI ने सख्त एक्शन लेते हुए निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक को ‘गैर-निष्पादक’ (non-performer) घोषित कर दिया है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है और टोल वसूली पर भी रोक लगा दी गई है। दूसरी ओर, PNC इंफ्राटेक ने सफाई देते हुए कहा कि भारी बारिश की वजह से ऐसा हुआ है और केवल 0.5 प्रतिशत हिस्सा ही प्रभावित है, जिसकी मरम्मत का खर्च कंपनी खुद उठाएगी।

सड़क की गुणवत्ता की जांच के लिए IIT खड़गपुर की टीम ने 23 स्थानों पर सर्वे पूरा कर लिया है। विशेषज्ञों ने 10 अगस्त को सलाह दी थी कि एक्सप्रेस-वे को तुरंत बंद कर वैज्ञानिक तरीके से मरम्मत की जाए, जिसमें करीब तीन महीने लग सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना तकनीकी जांच के सिर्फ मिट्टी डालकर सड़क बनाई गई, जो भ्रष्टाचार का मामला हो सकता है। IIT की 800 पन्नों की रिपोर्ट अगले 12 दिनों में NHAI को सौंपी जाएगी।

यह पहली बार नहीं है जब यूपी के किसी बड़े एक्सप्रेस-वे में ऐसी समस्या आई है। इससे पहले प्रयागराज को मेरठ से जोड़ने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे का करीब 60 मीटर हिस्सा जुलाई 2026 में धंस गया था। उस एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, जिसके बाद UPEIDA ने जांच के आदेश दिए थे।