Lucknow में ग्राम रोजगार सेवकों का प्रदर्शन, विधान भवन घेरने की कोशिश की तो पुलिस ने रोका

UP/Lucknow: उत्तर प्रदेश के ग्राम रोजगार सेवक अपनी पुरानी मांगों को लेकर लखनऊ की सड़कों पर उतरे। बुधवार, 1 जुलाई 2026 को बड़ी संख्या में रोजगार सेवकों ने विधान भवन का घेराव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें दारुलशफ

UP/Lucknow: उत्तर प्रदेश के ग्राम रोजगार सेवक अपनी पुरानी मांगों को लेकर लखनऊ की सड़कों पर उतरे। बुधवार, 1 जुलाई 2026 को बड़ी संख्या में रोजगार सेवकों ने विधान भवन का घेराव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें दारुलशफा के सामने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, जिसके बाद प्रदर्शन खत्म हुआ।

प्रदर्शन कर रहे उत्तर प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ और ग्राम रोजगार सेवक (पंचायत मित्र) वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4 अक्टूबर 2021 को उनके हित में कई घोषणाएं की थीं, लेकिन करीब पांच साल बीत जाने के बाद भी उन्हें लागू नहीं किया गया है। संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष राम लखन तिवारी और प्रांतीय प्रभारी कुलदीप द्विवेदी ने बताया कि वे जून के मध्य से ही विरोध कर रहे थे और अब मामला गंभीर हो गया है।

रोजगार सेवकों की मुख्य समस्या उनका मानदेय और नौकरी का दर्जा है। वे साल 2006 से मनरेगा के तहत संविदा पर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अभी तक राज्य कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • संविदा खत्म कर उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
  • उन्हें सहायक सचिव या ग्राम विकास सहायक के पद पर समायोजित किया जाए।
  • वर्तमान 7,788 रुपये के बजाय न्यूनतम 24,000 रुपये प्रति माह मानदेय मिले।
  • ईपीएफ, स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा अवकाश जैसी सुविधाएं दी जाएं।
  • मृतक आश्रितों को सेवा में समायोजित किया जाए।
  • जॉब चार्ट में मनरेगा के अलावा अन्य विभागीय कार्यों को भी जोड़ा जाए।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कई सेवकों को पिछले डेढ़ से दो साल से उनका मौजूदा मानदेय भी नहीं मिला है, जिससे वे भारी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। संगठन का दावा है कि इस उपेक्षा और तंगी की वजह से कुछ रोजगार सेवकों ने आत्महत्या तक कर ली है। सेवकों ने चेतावनी दी है कि अगर मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे लखनऊ के इको गार्डन में अनिश्चितकालीन आंदोलन करेंगे और बाद में भूख हड़ताल के साथ फिर से विधान भवन का घेराव करेंगे।