UP: सहारनपुर समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों के ग्राम प्रधानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंचायत चुनाव में देरी और प्रशासक की नियुक्ति की संभावना से नाराज प्रधान अब 20 मई 2026 को लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर पार्क में
UP: सहारनपुर समेत उत्तर प्रदेश के कई जिलों के ग्राम प्रधानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पंचायत चुनाव में देरी और प्रशासक की नियुक्ति की संभावना से नाराज प्रधान अब 20 मई 2026 को लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर पार्क में बड़ा प्रदर्शन करेंगे। इस विरोध प्रदर्शन में करीब 58,000 ग्राम प्रधानों के शामिल होने की उम्मीद है।
प्रशासक की नियुक्ति पर क्यों मचा है बवाल?
ग्राम प्रधानों का कहना है कि उनका कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो रहा है, लेकिन अभी तक चुनाव की तारीखें तय नहीं हुई हैं। ऐसे में सरकार ADO पंचायत जैसे अधिकारियों को प्रशासक नियुक्त कर सकती है। प्रधानों का मानना है कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को हटाकर अधिकारी थोपना लोकतंत्र के खिलाफ है। उनका कहना है कि इससे गांव की सत्ता जनता के हाथ से निकल जाएगी।
क्या है प्रधानों की मुख्य मांगें?
राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष ललित शर्मा और अखिल भारतीय प्रधान संगठन के नेताओं ने अपनी मांगें रखी हैं। उनकी मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:
- समय पर पंचायत चुनाव कराए जाएं।
- यदि चुनाव में देरी होती है, तो वर्तमान प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाया जाए।
- प्रशासक नियुक्त करने के बजाय मौजूदा प्रधानों को ही प्रशासनिक समिति का सदस्य बनाया जाए।
नियम क्या कहते हैं और अब तक क्या हुआ?
UP पंचायत राज अधिनियम 1947 के अनुसार, अगर समय पर चुनाव नहीं होते तो सरकार 6 महीने के लिए प्रशासक नियुक्त कर सकती है, जिसके बाद चुने हुए प्रधान का पद खत्म हो जाता है। प्रधानों ने आरोप लगाया है कि पहले जब प्रशासक आए तो पैसों की हेराफेरी हुई और पारदर्शिता खत्म हो गई। इस मुद्दे पर एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की है, जिस पर मुख्यमंत्री ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ग्राम प्रधान 20 मई को लखनऊ क्यों जा रहे हैं?
ग्राम प्रधान पंचायत चुनावों में देरी और 26 मई को कार्यकाल खत्म होने के बाद अधिकारियों (प्रशासकों) की नियुक्ति का विरोध करने के लिए लखनऊ कूच कर रहे हैं।
प्रधानों की मुख्य मांग क्या है?
उनकी मांग है कि या तो समय पर चुनाव हों, या फिर उनका कार्यकाल बढ़ाया जाए, ताकि विकास कार्य न रुकें और सत्ता जनता के प्रतिनिधियों के पास रहे।