UP में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 271 शिक्षकों के तबादले, जल्द संभालेंगे नया कार्यभार
UP: उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत 271 सरप्लस शिक्षकों के तबादले के आदेश जारी हो गए हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 की नीति के तहत यह कदम उठाया है। आदेश मिलने के बाद अब ये सभी
UP: उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत 271 सरप्लस शिक्षकों के तबादले के आदेश जारी हो गए हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 की नीति के तहत यह कदम उठाया है। आदेश मिलने के बाद अब ये सभी शिक्षक जल्द ही अपने नए स्कूलों में जाकर ड्यूटी संभालेंगे।
विभाग ने शिक्षकों के स्थानांतरण और समायोजन के लिए एक खास नीति बनाई है। इसके तहत कुल संवर्ग के अधिकतम 20 प्रतिशत शिक्षकों का ही तबादला किया जा सकता है, हालांकि विभागीय मंत्री के पास इस सीमा को बढ़ाने का अधिकार है। स्कूलों को तीन अलग-अलग जोन में बांटा गया है ताकि तैनाती सही तरीके से हो सके। जोन-1 में जिला मुख्यालय या नगर निकाय से 8 किमी तक का क्षेत्र है, जोन-2 में तहसील मुख्यालय से 2 किमी तक और जोन-3 इसके बाहर के इलाके हैं। नई नियुक्तियों में सबसे पहले जोन-3 को प्राथमिकता दी जाएगी और वहां कम से कम तीन साल की सेवा करना जरूरी होगा।
सरप्लस शिक्षकों की पहचान ‘लास्ट इन, फर्स्ट आउट’ (LIFO) नियम से की गई है। इसका मतलब है कि जिस शिक्षक ने स्कूल में सबसे बाद में जॉइन किया था, उसे पहले अतिरिक्त मानकर स्थानांतरित किया गया। हालांकि, कुछ शिक्षकों को इस प्रक्रिया से छूट दी गई है। गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, किडनी या लीवर की बीमारी से जूझ रहे शिक्षक, दिव्यांग शिक्षक, सेना में तैनात कर्मियों के पति-पत्नी और 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके शिक्षकों को समायोजन से बाहर रखा गया है। दिव्यांग शिक्षकों को इस पूरी प्रक्रिया में विशेष वरीयता दी गई है।
दूसरी ओर, परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए स्थिति थोड़ी अलग है। यहां विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों की प्रक्रिया अब भी अटकी हुई है और करीब 7000 आवेदन लंबित हैं। दस्तावेजों की जांच में दिक्कत आने के कारण बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) से प्रमाणपत्रों की प्रमाणित प्रतियां दोबारा मांगी हैं, जिससे इस प्रक्रिया में देरी हो सकती है।
परिषदीय स्कूलों में केवल उन्हीं शिक्षकों के आवेदनों पर विचार हो रहा है जो विशेष परिस्थितियों में हैं, जैसे कि शिक्षक या उनके परिवार का सदस्य 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग हो या गंभीर बीमारी से पीड़ित हो। इस बार न्यूनतम सेवा अवधि की शर्त को हटा दिया गया है, जिससे कई शिक्षकों को राहत मिली है। हालांकि, तबादला होने वाले शिक्षकों को नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रहना होगा और वे भविष्य में पदोन्नति के लिए पुराने वरिष्ठता का दावा नहीं कर पाएंगे।