UP: गंगोह क्षेत्र के 50 से ज्यादा ग्राम प्रधान और उनके प्रतिनिधि मंगलवार को लखनऊ के लिए रवाना हुए। ये सभी लोग ग्राम पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन और बैठक में हिस्सा लेंगे। उत्तर प्रदे
UP: गंगोह क्षेत्र के 50 से ज्यादा ग्राम प्रधान और उनके प्रतिनिधि मंगलवार को लखनऊ के लिए रवाना हुए। ये सभी लोग ग्राम पंचायतों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन और बैठक में हिस्सा लेंगे। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का वर्तमान कार्यकाल 26 मई 2026 को खत्म हो रहा है, जिसे लेकर प्रधानों में काफी चिंता है।
कार्यकाल बढ़ाने की मांग और प्रदर्शन की वजह क्या है?
ग्राम प्रधानों का कहना है कि उनका कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन के बैनर तले लखनऊ के हजरतगंज और जीपीओ पार्क जैसे इलाकों में प्रदर्शन हुए। प्रधानों की मांग है कि अगर समय पर चुनाव नहीं होते हैं, तो मौजूदा प्रधानों को ही कार्यवाहक प्रशासक नियुक्त किया जाए। इस मामले में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात कर उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों पर विचार करेगी और समय पर चुनाव कराने की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
क्या चुनाव में देरी होने की संभावना है?
खबरों के मुताबिक, ओबीसी आरक्षण की प्रक्रिया और एक समर्पित ओबीसी आयोग के गठन के कारण पंचायत चुनावों में देरी हो सकती है। इस आयोग का कार्यकाल छह महीने का है, जिसकी रिपोर्ट के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी। ऐसी संभावना है कि चुनाव अगले साल विधानसभा चुनावों के बाद हों। इस बीच, पंचायती राज विभाग ने सरकार को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें समय पर चुनाव न होने की स्थिति में प्रशासक समिति बनाने की बात कही गई है, जिसमें निवर्तमान प्रधानों को शामिल किया जा सकता है।
सरकारी नियम और विभाग का क्या कहना है?
पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित सिंह ने साफ किया है कि मौजूदा नियमों के तहत ग्राम प्रधानों का कार्यकाल बढ़ाना संभव नहीं है। पंचायती राज अधिनियम 1947 की धारा 12 (3A) के अनुसार, चुनाव न होने पर सरकार या जिलाधिकारी प्रशासक नियुक्त कर सकते हैं। हालांकि, विभाग ने मुख्यमंत्री को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें केवल सरकारी अधिकारियों के बजाय जनप्रतिनिधियों की प्रशासक समिति बनाने का सुझाव दिया गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यूपी में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल कब खत्म हो रहा है?
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों, जिला पंचायत सदस्यों और क्षेत्र पंचायत सदस्यों का वर्तमान कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है।
पंचायत चुनाव में देरी क्यों हो रही है?
ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया और समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के कारण चुनावों में देरी की संभावना है। आयोग का कार्यकाल छह महीने का है, जिससे चुनाव अगले साल विधानसभा चुनावों के बाद हो सकते हैं।