UP के वन विभाग में आउटसोर्सिंग पर बवाल, काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे कर्मचारी

UP : उत्तर प्रदेश के वन विभाग में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) के एक आदेश ने हड़कंप मचा दिया है। इस आदेश के बाद प्रदेश भर के वनकर्मी सड़कों पर उतर आए हैं और अपनी नौकरी बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है

UP : उत्तर प्रदेश के वन विभाग में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) के एक आदेश ने हड़कंप मचा दिया है। इस आदेश के बाद प्रदेश भर के वनकर्मी सड़कों पर उतर आए हैं और अपनी नौकरी बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की नई नीति उनके भविष्य को अंधकार में डाल देगी।

मामला 17 जुलाई 2026 को जारी एक पत्र से शुरू हुआ, जिसमें चंदौली जिले की नौगढ़ तहसील के जरिए निर्देश दिया गया कि अब वृक्षारोपण और अन्य सभी काम दैनिक मजदूरी के बजाय आउटसोर्सिंग या ठेकेदारी प्रथा से कराए जाएंगे। इस फैसले के खिलाफ न्यू दैनिक वेतनभोगी वन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष भोरिक यादव ने मोर्चा खोल दिया है।

विरोध प्रदर्शन के तहत 11 से 13 अगस्त 2026 तक प्रदेश के सभी वनकर्मी काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं और इसे काला दिवस के रूप में मना रहे हैं। 11 अगस्त को हर जिले में वन प्रभाग और निदेशक को काला मांग पत्र सौंपा गया है। संघ ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 25 अगस्त 2026 को लखनऊ में वन मुख्यालय का घेराव किया जाएगा।

वनकर्मियों ने इस नीति को जंगल नीलामी अध्यादेश बताया है। उनका कहना है कि पिछले 20-25 सालों से काम कर रहे कर्मचारियों के सामने अब भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। ठेकेदारी प्रथा आने से मजदूरी में दलाली बढ़ेगी और कागजी वृक्षारोपण जैसे घोटालों की संभावना बढ़ जाएगी। साथ ही, कर्मचारियों का मानना है कि समर्पित कर्मचारियों पर से सीधा नियंत्रण खत्म होने से वन संपदा असुरक्षित हो सकती है।