UP के देवरिया में छात्रों को सिखाया गया आग से बचाव, लखनऊ हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट

देवरिया: लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब देवरिया में छात्रों को आग से बचने के तरीके सिखाए जा रहे हैं। घाटी इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में बच्चों को बताया गया कि आग

देवरिया: लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद अब देवरिया में छात्रों को आग से बचने के तरीके सिखाए जा रहे हैं। घाटी इंस्टीट्यूट द्वारा आयोजित एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में बच्चों को बताया गया कि आग लगने पर घबराने के बजाय धैर्य से काम कैसे लें। इस दौरान लखनऊ हादसे में जान गंवाने वाले मासूम बच्चों की याद में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि भी दी गई।

प्रशिक्षक प्रदुमन कुमार शर्मा ने छात्रों को आग से बचाव के व्यावहारिक तरीके समझाए और उन्हें आपातकालीन स्थिति से निपटने की सलाह दी। यह कदम लखनऊ के अलीगंज में 22 जून 2026 को हुई उस भीषण आग के बाद उठाया गया है, जिसमें 12 से 15 लोगों की जान चली गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश में कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लखनऊ हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे उत्तर प्रदेश में अस्पतालों, नर्सिंग होम, मेडिकल कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और शॉपिंग मॉल में व्यापक फायर सेफ्टी ऑडिट कराने का आदेश दिया है। सरकार ने सख्त निर्देश दिए हैं कि अब किसी भी बेसमेंट में कोचिंग या व्यावसायिक गतिविधियां नहीं चलेंगी। साथ ही, सभी व्यावसायिक भवनों के लिए अग्निशमन विभाग से प्राप्त NOC को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है।

देवरिया जिला प्रशासन भी अब पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। 24 जून 2026 को एसडीएम, तहसीलदार, पुलिस और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के कई कोचिंग संस्थानों की जांच की। टीम ने फायर सेफ्टी उपकरण, इमरजेंसी एग्जिट और रजिस्ट्रेशन के कागजात चेक किए। अब तक 10 से ज्यादा संस्थानों का निरीक्षण हो चुका है और कमियां पाए जाने पर उन्हें सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही बरतने वाले संस्थानों को सील करने की चेतावनी भी दी गई है।

बता दें कि लखनऊ हादसे के बाद अब तक पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 84 कोचिंग सेंटर सील किए जा चुके हैं, जिनमें प्रयागराज और मुरादाबाद के संस्थान भी शामिल हैं। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी किसी घटना की पुनरावृत्ति न हो और छात्रों की सुरक्षा से कोई समझौता न किया जाए।