UP: गाजियाबाद के मंडोला गांव में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बीच एक दो मंजिला घर खड़ा है, जो अब संघर्ष का प्रतीक बन गया है। यह घर एक्सप्रेसवे के एक जरूरी एग्जिट रैंप के रास्ते में है, जिसकी वजह से यात्रियों को करीब 1
UP: गाजियाबाद के मंडोला गांव में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के बीच एक दो मंजिला घर खड़ा है, जो अब संघर्ष का प्रतीक बन गया है। यह घर एक्सप्रेसवे के एक जरूरी एग्जिट रैंप के रास्ते में है, जिसकी वजह से यात्रियों को करीब 1 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। घर के मालिक अपने ‘स्वाभिमान’ और सही मुआवजे के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं और मामला अब Supreme Court तक पहुंच गया है।
घर और सरकार के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?
यह विवाद करीब 28 साल पुराना है। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने 1998 में इस जमीन के अधिग्रहण का नोटिस दिया था और उस समय 1,000 से 1,100 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजे की पेशकश की थी। परिवार का कहना है कि इतने पुराने रेट पर जमीन देना संभव नहीं है, क्योंकि अब बाजार दर लगभग 35,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इसी मुआवजे की मांग को लेकर परिवार ने पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट और अब Supreme Court का दरवाजा खटखटाया है।
एक्सप्रेसवे और ट्रैफिक पर इसका क्या असर पड़ रहा है?
प्रधानमंत्री द्वारा 14 अप्रैल, 2026 को एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया जा चुका है, लेकिन यह 1,600 वर्ग मीटर का घर मुख्य एग्जिट रैंप के रास्ते में खड़ा है। NHAI ने ट्रैफिक निकालने के लिए पीछे से एक वैकल्पिक सर्विस रोड तो बनाई है, लेकिन वह मुख्य रैंप जितनी चौड़ी नहीं है। इससे वहां ट्रैफिक की समस्या बनी रहती है और लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
अब तक की कानूनी कार्यवाही और वर्तमान स्थिति क्या है?
- 2007: वीरसेन सरोहा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
- 2024: पोते लक्ष्यवीर सरोहा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद कोर्ट ने हाई कोर्ट को सुनवाई तेज करने को कहा।
- 28 जनवरी, 2026: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय की।
- वर्तमान स्थिति: जयपाल सिंह नाम के व्यक्ति पिछले चार सालों से इस घर की रखवाली कर रहे हैं।