UP, Bihar: उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों ने ऐतिहासिक बांसी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए श्रमदान शुरू किया है। गंडक की सहायक इस नदी का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है, लेकिन अब यह कचरे और
UP, Bihar: उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों ने ऐतिहासिक बांसी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए श्रमदान शुरू किया है। गंडक की सहायक इस नदी का धार्मिक महत्व बहुत ज्यादा है, लेकिन अब यह कचरे और गाद की वजह से दम तोड़ रही है। लोग अब खुद आगे आकर नदी की सफाई कर रहे हैं ताकि इसका पुराना स्वरूप वापस मिल सके।
बांसी नदी की वर्तमान स्थिति और समस्या क्या है?
बांसी नदी नेपाल की पहाड़ियों से निकलकर कुशीनगर जिले के पिपरा-पिपरासी, मधुबनी और पडरौना से होते हुए नारायणी नदी में मिलती है। इस नदी के बारे में ‘सौ काशी, एक बांसी’ की कहावत मशहूर है और माना जाता है कि भगवान राम ने यहां स्नान किया था। फिलहाल नदी में जलकुंभी, शहरी सीवेज और चीनी मिलों का कचरा जमा हो गया है, जिससे पानी काला पड़ गया है और बहाव रुक गया है।
सरकार और प्रशासन क्या कदम उठा रहे हैं?
प्रशासनिक स्तर पर कई योजनाएं बनाई गई हैं। मधुबनी के बीडीओ कुंदन कुमार ने कहा है कि माघी अमावस्या (जनवरी 2026) से पहले नदी के पुनरुद्धार के लिए कार्रवाई की जाएगी। वहीं, सीओ नंदलाल राम के मुताबिक सबसे पहले बांसी धाम के दोनों ओर 1 किलोमीटर तक के अतिक्रमण को हटाया जाएगा। इसके अलावा, कुशीनगर के गोला घाट के पास एक स्थायी पुल बनाने की तैयारी है, जिसके लिए तहसील प्रशासन जमीन का सर्वे कर रहा है।
स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं की क्या राय है?
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मनोज साह ने प्रशासन की धीमी रफ्तार पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पहले भी बिहार और यूपी प्रशासन ने संयुक्त प्रयास किए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर काम कम हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर नदी के अस्तित्व को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
बांसी नदी का धार्मिक महत्व क्या है?
बांसी नदी को बहुत पवित्र माना जाता है और इसके लिए ‘सौ काशी, एक बांसी’ कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान राम ने जनकपुर से अयोध्या लौटते समय इसके तट पर स्नान किया था और शिव पूजा की थी।
नदी के पुनरुद्धार के लिए प्रशासन की क्या योजना है?
प्रशासन बांसी धाम के पास 1 किमी तक अतिक्रमण हटाएगा और जनवरी 2026 तक सफाई कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। साथ ही गोला घाट के पास एक स्थायी पुल का निर्माण भी किया जाएगा।