UP और Bihar में पुलिस भर्ती परीक्षा में सॉल्वर गैंग का जाल, कई फर्जी परीक्षार्थी और अधिकारी गिरफ्तार

UP/Bihar: पुलिस भर्ती परीक्षाओं में नकल माफिया और सॉल्वर गैंग एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग जिलों में पुलिस ने छापेमारी कर कई फर्जी परीक्षार्थियों और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। व्हाट्स

UP/Bihar: पुलिस भर्ती परीक्षाओं में नकल माफिया और सॉल्वर गैंग एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार के अलग-अलग जिलों में पुलिस ने छापेमारी कर कई फर्जी परीक्षार्थियों और संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। व्हाट्सएप चैट और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आधार पर इन गिरोहों के कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं, ताकि असली मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।

बिहार के मुजफ्फरपुर में 28 जून 2026 को एक फर्जी बायोमेट्रिक अधिकारी को पकड़ा गया, जो परीक्षा केंद्र में घुसने की कोशिश कर रहा था। इससे पहले 15 जून को समस्तीपुर में पुलिस ने एक बड़ी साजिश नाकाम की, जहां चार अपराधियों और एक वीडियोग्राफर को गिरफ्तार किया गया। इनके पास से अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड और कई इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बरामद हुए हैं।

वहीं उत्तर प्रदेश में भी नकल माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हुई है। मेरठ में 10 जून को एक ‘मुन्नाभाई’ पकड़ा गया, जो बिहार का रहने वाला था और एटा के एक अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दे रहा था। उसके पास से फर्जी पहचान पत्र और एडिटेड एडमिट कार्ड मिले। इसी दिन यूपी में आरक्षी भर्ती परीक्षा के आखिरी दिन कुल सात लोग गिरफ्तार हुए, जिनमें दो सॉल्वर शामिल थे।

उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने नकल माफिया को लेकर सख्त चेतावनी दी है। अब यूपी सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम-2024 लागू हो गया है। इस कानून के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर 7 साल की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरी बार पकड़े जाने पर आजीवन कारावास और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, आरोपियों की संपत्ति भी जब्त की जा सकती है।

डीजीपी प्रशांत कुमार ने निर्देश दिए हैं कि नकल माफिया के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारियों पर नजर रखी जाए। भर्ती बोर्ड ने साफ कहा है कि परीक्षा के प्रश्नपत्र या किसी भी कंटेंट को सोशल मीडिया पर साझा करना दंडनीय अपराध माना जाएगा।