UP और Bihar से पलायन पर चर्चा, रोजगार की कमी से बदल रहा गांवों का सामाजिक ढांचा

Bihar/UP: उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन एक गंभीर समस्या बन गया है। हाल ही में आरा के SB कॉलेज में इस विषय पर एक व्याख्यान हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने बताया कि रोजगार, बेहतर शिक

Bihar/UP: उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन एक गंभीर समस्या बन गया है। हाल ही में आरा के SB कॉलेज में इस विषय पर एक व्याख्यान हुआ, जिसमें विशेषज्ञों ने बताया कि रोजगार, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हैं। इस पलायन का सीधा असर गांवों के सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहा है।

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राम कृष्ण ठाकुर और कॉलेज की प्राचार्या प्रो. मीना कुमारी ने चर्चा के दौरान कहा कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ाना अब सबसे जरूरी है। डॉ. विजय राज कुमावत ने इस बात पर जोर दिया कि जब युवा काम की तलाश में बाहर जाते हैं, तो पीछे छूटे परिवार और समाज की संरचना में बदलाव आता है।

लोकसभा में श्रम मंत्रालय ने 4 अगस्त 2026 को बताया कि केंद्र और यूपी सरकार पलायन रोकने के लिए कई कदम उठा रही हैं। इसमें National Career Service (NCS) पोर्टल, One District One Product (ODOP) योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और कौशल विकास कार्यक्रम जैसे प्रयास शामिल हैं। साथ ही, ग्रामीण मजदूरों के लिए अब 100 के बजाय 125 दिनों का काम मिलेगा और काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।

पलायन के आंकड़ों और कारणों पर नजर डालें तो स्थिति काफी चिंताजनक है। अलग-अलग अध्ययनों में सामने आई मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

विवरण मुख्य जानकारी
कुल पलायन (टाटा इंस्टीट्यूट) बिहार से लगभग 63 लाख मजदूर बाहर गए, जिनमें 71% अन्य राज्यों में हैं
पलायन का मुख्य कारण (CSDS) 58.2% लोगों ने काम और रोजगार की तलाश को मुख्य वजह बताया
पटना वीमेंस कॉलेज अध्ययन रोजगार की कमी, जलवायु परिवर्तन और सरकारी उदासीनता प्रमुख कारण
सामाजिक प्रभाव बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर और कई बच्चों का बाल श्रमिक बनना
सरकारी प्राथमिकताएं राज्य सरकार ने 13 प्रकार के कार्यों को प्राथमिकता दी है

मजदूरों की स्थिति पर बात करते हुए बताया गया कि बाहर जाने वाले श्रमिकों को अक्सर असुरक्षित और अस्वच्छ माहौल में रहना पड़ता है। उन्हें बुनियादी सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पाता। वहीं, तेजस्वी यादव ने पलायन की भयावहता को देखते हुए बिहार का नाम ‘श्रमिक प्रदेश’ करने का सुझाव भी दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर रिवर्स पलायन बढ़ा, तो जमीन पर जनसंख्या का दबाव और बेरोजगारी और बढ़ सकती है।