UP: बरेली के भमोरा इलाके में पुलिस और ग्राम प्रधानों के बीच उस वक्त तीखी नोंकझोंक हो गई जब पुलिस ने लखनऊ जा रहे प्रधानों को रास्ते में ही रोक लिया। यह पूरा मामला ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को बढ़ाने और उन्हें प्रशासक निय
UP: बरेली के भमोरा इलाके में पुलिस और ग्राम प्रधानों के बीच उस वक्त तीखी नोंकझोंक हो गई जब पुलिस ने लखनऊ जा रहे प्रधानों को रास्ते में ही रोक लिया। यह पूरा मामला ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को बढ़ाने और उन्हें प्रशासक नियुक्त करने की मांग से जुड़ा है। काफी देर तक चली बहस के बाद प्रधान पुलिस की बात मानकर वापस लौटे।
प्रधानों को लखनऊ जाने से क्यों रोका गया
ग्राम प्रधान अपने कार्यकाल के विस्तार या प्रशासक बनाए जाने की मांग को लेकर पंचायती राज मंत्री के कार्यक्रम में शामिल होने लखनऊ जा रहे थे। 26 मई 2026 को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लेकिन आरक्षण प्रक्रिया में देरी की वजह से चुनाव टलने की आशंका है। इसी वजह से अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संघ और अन्य संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
सरकार और मंत्रियों का इस पर क्या कहना है
उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने 18 मई को लखनऊ में प्रदर्शन कर रहे प्रधानों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार उनके हितों का ध्यान रखेगी। वहीं, पंचायती राज मंत्री Om Prakash Rajbhar ने 28 अप्रैल को कहा था कि अगर चुनाव समय पर नहीं हुए, तो कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा। फिलहाल पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी मिल चुकी है, जो छह महीने में अपनी रिपोर्ट देगा।
प्रधानों की मुख्य मांगें क्या हैं
प्रधानों का कहना है कि जब तक अगले पंचायत चुनाव नहीं हो जाते, तब तक उन्हें ही प्रशासनिक जिम्मेदारी दी जाए। उन्होंने राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों का उदाहरण दिया जहां ऐसा किया गया था। वर्तमान में यह मामला उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है, इसलिए शासन स्तर पर प्रशासकों की नियुक्ति पर चर्चा चल रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ग्राम प्रधानों के कार्यकाल की समाप्ति तिथि क्या है?
उत्तर प्रदेश के ग्राम प्रधानों का वर्तमान कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है।
प्रधानों की मुख्य मांग क्या है?
प्रधानों की मांग है कि उनके कार्यकाल को बढ़ाया जाए या चुनाव होने तक उन्हें प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाए।