UP में रफ्तार पकड़ रहे ATS, 35 स्टेशनों से जारी हुए 2.80 लाख फिटनेस सर्टिफिकेट
UP: उत्तर प्रदेश में कमर्शियल वाहनों के फिटनेस टेस्ट की प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो गई है। राज्य के 27 जिलों में चल रहे 35 ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों (ATS) के जरिए अब तक 2.80 लाख से ज्यादा फिटनेस प्रम
UP: उत्तर प्रदेश में कमर्शियल वाहनों के फिटनेस टेस्ट की प्रक्रिया अब पहले से ज्यादा आसान और पारदर्शी हो गई है। राज्य के 27 जिलों में चल रहे 35 ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों (ATS) के जरिए अब तक 2.80 लाख से ज्यादा फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके हैं। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि यह सिस्टम राज्य में तेजी से काम कर रहा है और इसका मकसद फिटनेस जांच में इंसानी दखल को कम करना है।
इस नए सिस्टम में मशीनों और सेंसर का इस्तेमाल होता है जिससे फिटनेस सर्टिफिकेट जारी करने में सटीकता आती है और समय की बचत होती है। डिजिटल रिकॉर्डिंग और CCTV कैमरों की निगरानी की वजह से अब भ्रष्टाचार और लापरवाही की गुंजाइश बहुत कम हो गई है। परिवहन मंत्री के मुताबिक, यह कदम सड़क सुरक्षा और पर्यावरण की रक्षा के लिए जरूरी है क्योंकि केवल वही गाड़ियां सड़क पर उतरेंगी जो तकनीकी रूप से फिट होंगी, जिससे हादसों और प्रदूषण में कमी आएगी।
सभी वाहनों की जांच सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स, 1989 के मानकों के आधार पर की जा रही है। वर्तमान में 35 ATS चालू हैं और राज्य की पॉलिसी के तहत कुल 79 रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मंजूर किए गए हैं। सरकारी कमर्शियल वाहन जो 15 साल से पुराने हैं और फिटनेस रिन्यू कराने वाले प्राइवेट कमर्शियल वाहनों के लिए यह टेस्ट अनिवार्य है।
इसी बीच, लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुई आगजनी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे राज्य में बसों की सघन जांच के आदेश दिए हैं। 25 जून से 23 जुलाई 2026 तक चलने वाले इस अभियान में फायर सेफ्टी उपकरणों को अनिवार्य कर दिया गया है। जिन बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं होंगे या जो एक्सपायर हो चुके होंगे, उन्हें फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा। इसमें स्लीपर, स्कूल और कॉन्ट्रैक्ट कैरिज जैसी सभी बसें शामिल हैं।
परिवहन विभाग ATS खोलने के नियमों में भी बदलाव की तैयारी कर रहा है। सरकार को भेजे प्रस्ताव में जमीन की अनिवार्यता (2 एकड़) और 3 करोड़ के टर्नओवर जैसी शर्तों को हटाने की बात कही गई है। नए प्रस्ताव के अनुसार, मोटरसाइकिल के लिए 500 वर्ग फुट, हल्के वाहनों के लिए 1500 वर्ग फुट और सभी प्रकार के वाहनों के लिए 3500 वर्ग फुट जमीन की जरूरत होगी। इससे आने वाले समय में और ज्यादा टेस्टिंग स्टेशन खुल सकेंगे।