UP में कोविड ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले सभी आवश्यक कर्मी कहलाएंगे ‘कोरोना वॉरियर’, हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
UP : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक बहुत जरूरी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि कोविड महामारी के दौरान जिन सरकारी कर्मचारियों ने आवश्यक सेवाओं में काम किया और अपनी जान गंवाई, उन सभी को ‘कोरोना वॉरियर̵
UP : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक बहुत जरूरी फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि कोविड महामारी के दौरान जिन सरकारी कर्मचारियों ने आवश्यक सेवाओं में काम किया और अपनी जान गंवाई, उन सभी को ‘कोरोना वॉरियर’ माना जाएगा। इस फैसले से उन कई परिवारों को राहत मिलेगी जो मुआवजे के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे।
यह पूरा मामला मृतक हेड कांस्टेबल बलवंत प्रताप से जुड़ा है। उनकी पत्नी श्रीमती सेम्मा भारती ने मुआवजे के लिए याचिका दायर की थी। राज्य सरकार ने पहले उनके दावे को यह कहकर खारिज कर दिया था कि मृतक सीधे तौर पर कोविड के इलाज या रोकथाम की ड्यूटी में नहीं थे। लेकिन जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की बेंच ने सरकार के 27 अगस्त 2024 के आदेश को रद्द कर दिया है।
कोर्ट ने साफ किया कि ‘कोविड ड्यूटी’ का मतलब सिर्फ अस्पताल में काम करना नहीं है। इसमें पुलिस, बिजली, पानी, टेलीफोन और अन्य जरूरी सेवाओं में लगे कर्मचारी भी शामिल हैं, क्योंकि महामारी के दौरान इन सबकी भूमिका अहम थी। कोर्ट ने पाया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी और पुलिस विभाग के कागजात यह साबित करते हैं कि बलवंत प्रताप ने जन जागरूकता और संक्रमितों की मदद के लिए काम किया था।
अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह मृतक हेड कांस्टेबल के परिवार को 50 लाख रुपये का अनुग्रह भुगतान आठ सप्ताह के भीतर दे। कोर्ट ने अपने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि मुआवजे के दावों में देरी नहीं होनी चाहिए और अधिकारियों को सीधे निर्णय लेना चाहिए।