UP: मुरादाबाद में सपा की गुटबाजी पर भड़के अखिलेश यादव, लखनऊ बुलाकर बड़े नेताओं को दी कड़ी चेतावनी
UP/Lucknow: समाजवादी पार्टी के भीतर मुरादाबाद में चल रही अंदरूनी खींचतान अब पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की नजरों में आ गई है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अखिलेश यादव ने 26 जून को लखनऊ में मुरादाबाद के पांच बड़े नेताओं
UP/Lucknow: समाजवादी पार्टी के भीतर मुरादाबाद में चल रही अंदरूनी खींचतान अब पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की नजरों में आ गई है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अखिलेश यादव ने 26 जून को लखनऊ में मुरादाबाद के पांच बड़े नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई। बैठक में उन्होंने संगठन के भीतर चल रही गुटबाजी पर सख्त नाराजगी जताई और नेताओं को अनुशासन में रहने की हिदायत दी।
पूरा विवाद मुरादाबाद में आयोजित एक पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मेलन से शुरू हुआ। आरोप है कि इस कार्यक्रम में मुरादाबाद की सांसद रुचि वीरा को दरकिनार किया गया और उनके पोस्टर-बैनर से फोटो भी हटा दिए गए। रुचि वीरा ने इस बात की लिखित शिकायत पार्टी नेतृत्व से की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री और विधायक कमाल अख्तर गुटबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं और उन्हें जानबूझकर कार्यक्रम से दूर रखा गया, हालांकि कमाल अख्तर ने इन आरोपों को गलत बताया है।
लखनऊ में हुई बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने जिलाध्यक्ष जयवीर यादव से कड़े सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि संगठन में गुटबाजी क्यों चल रही है और बिना मुख्यालय की अनुमति के पीडीए बैठक का आयोजन कैसे किया गया। बैठक में राज्यसभा सांसद जावेद अली और पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी भी मौजूद थे। जावेद अली ने इस पूरे विवाद और गुटबाजी से अपना कोई लेना-देना होने से इनकार किया है।
अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी में किसी भी तरह की गुटबाजी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने नेताओं को निर्देश दिया कि वे अपने व्यक्तिगत मतभेदों को किनारे रखकर संगठन को मजबूत करें और आने वाले चुनावों की तैयारी में जुटें। सपा प्रमुख ने चेतावनी दी कि अगर समय रहते इस स्थिति को नहीं सुधारा गया तो पार्टी को नुकसान होगा। उन्होंने घोषणा की कि वे खुद इस पूरे मामले की समीक्षा करेंगे और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इस बैठक के बाद नेताओं ने तो एकजुटता दिखाने की कोशिश की है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह खींचतान अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। सांसद रुचि वीरा ने साफ किया है कि उनकी नाराजगी पार्टी या अखिलेश यादव से नहीं, बल्कि उन स्थानीय नेताओं से है जिन्होंने उन्हें किनारे करने की कोशिश की।