Delhi में छात्र प्रदर्शन पर UN की नजर, मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के बाद दर्ज हुई शिकायत

Delhi: राजधानी दिल्ली में NEET-UG 2026 परीक्षा की गड़बड़ियों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे छात्र प्रदर्शनों में अब संयुक्त राष्ट्र (UN) की एंट्री हुई है। 20 जुलाई 2026 को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान

Delhi: राजधानी दिल्ली में NEET-UG 2026 परीक्षा की गड़बड़ियों, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे छात्र प्रदर्शनों में अब संयुक्त राष्ट्र (UN) की एंट्री हुई है। 20 जुलाई 2026 को ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों के बाद मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। इस घटना को लेकर UN के मानवाधिकार कार्यालय में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है।

यह शिकायत पूर्व टीएमसी राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने 22 जुलाई 2026 को UN मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) की स्पेशल प्रोसीजर्स शाखा में जमा की। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने बुरा बर्ताव किया। इसमें मनमाने ढंग से हिरासत में लेने, आंसू गैस और लाठीचार्ज के जरिए बल प्रयोग करने और पत्रकारों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक कम से कम 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए और करीब 70 लोगों को हिरासत में लिया गया, हालांकि विपक्षी नेताओं का दावा है कि यह संख्या कहीं ज्यादा थी।

25 जुलाई 2026 को UN प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र दिल्ली के इन प्रदर्शनों से अवगत है। उन्होंने जोर दिया कि लोगों को बिना किसी डर, गिरफ्तारी या चोट के शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार मिलना चाहिए और सुरक्षा बलों की यह जिम्मेदारी है कि वे इन अधिकारों की रक्षा करें। इस मामले में ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी चिंता जताई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने दिल्ली एलजी द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने के फैसले को मानवाधिकारों का उल्लंघन बताया है।

दूसरी तरफ, भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने 25 जुलाई को प्रेस ब्रीफिंग में स्वीकार किया कि दिल्ली में प्रदर्शन हुए हैं और लोगों ने अपनी राय रखी है। हालांकि, उन्होंने UN के बयान या विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की। इसी बीच, NEET-UG विवाद और विरोध प्रदर्शनों के बीच देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।