Delhi: 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कोर्ट से अपनी जमानत याचिका खारिज करने वाले फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उमर खालिद ने
Delhi: 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपी उमर खालिद ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कोर्ट से अपनी जमानत याचिका खारिज करने वाले फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उमर खालिद ने यह अपील की है कि उनकी इस याचिका पर बंद कमरे के बजाय खुली अदालत में सुनवाई की जाए।
उमर खालिद ने रिव्यू पिटीशन क्यों दाखिल की?
उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को उन्होंने रिव्यू पिटीशन दाखिल की। उनके वकील कपिल सिब्बल ने मांग की है कि इस मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में हो, जबकि आमतौर पर ऐसी याचिकाओं पर जजों के चैंबर में विचार किया जाता है।
कोर्ट ने इस मांग पर क्या कहा?
इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच कर रही है। जब खुली अदालत में सुनवाई की मांग उठी, तो जस्टिस अरविंद कुमार ने कहा कि वे पहले कागजातों की जांच करेंगे और अगर जरूरत महसूस हुई तो सुनवाई के लिए बुलाएंगे। यह मामला 16 अप्रैल 2026 (कुछ रिपोर्टों के अनुसार 15 अप्रैल) को चैंबर में विचार के लिए रखा गया है।
केस से जुड़ी मुख्य बातें
| विवरण |
जानकारी |
| गिरफ्तारी की तारीख |
13 सितंबर 2020 |
| SC ने जमानत कब खारिज की |
5 जनवरी 2026 |
| रिव्यू पिटीशन की तारीख |
13 अप्रैल 2026 |
| वकील का नाम |
कपिल सिब्बल |
| संबंधित कानून |
UAPA की धारा 43D(5) |
सुप्रीम कोर्ट ने पहले कहा था कि UAPA कानून के तहत अगर आरोप प्रथम दृष्टया सही लगते हैं, तो जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि मुकदमे में देरी होना जमानत पाने का कोई ठोस आधार नहीं हो सकता।