UK में बड़ा राजनीतिक उलटफेर, प्रधानमंत्री Keir Starmer ने दिया इस्तीफा, Andy Burnham बन सकते हैं नए नेता

World : ब्रिटेन की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। वहां की सत्ताधारी Labour Party के नेता और प्रधानमंत्री Keir Starmer ने अपने पद से हटने का फैसला किया है। Starmer ने 22 जून 2026 को अपने इस्तीफे की घोषणा की, लेकिन जब त

World : ब्रिटेन की राजनीति में एक बड़ा बदलाव आया है। वहां की सत्ताधारी Labour Party के नेता और प्रधानमंत्री Keir Starmer ने अपने पद से हटने का फैसला किया है। Starmer ने 22 जून 2026 को अपने इस्तीफे की घोषणा की, लेकिन जब तक पार्टी नया नेता नहीं चुन लेती, वे केयरटेकर प्रधानमंत्री के तौर पर काम संभालते रहेंगे।

Starmer का यह फैसला उस समय आया है जब सरकार की लोकप्रियता में भारी गिरावट देखी जा रही थी। हाल ही में हुए एक उपचुनाव में Andy Burnham की बड़ी जीत ने Starmer की लीडरशिप पर सवाल खड़े कर दिए थे। राजनीतिक गलियारों में Burnham अब सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभरे हैं।

पार्टी के अंदरूनी हालात काफी तनावपूर्ण थे। बताया जा रहा है कि आधा दर्जन से ज्यादा कैबिनेट मंत्रियों ने Starmer से कह दिया था कि अब उनके हटने का समय आ गया है। हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सीनियर सदस्य Charlie Falconer ने भी कहा था कि Starmer के पास अब कोई अधिकार नहीं बचा है और Andy Burnham के साथ एक सही बदलाव की जरूरत है।

Labour Party के नियमों के मुताबिक, नेतृत्व की दौड़ में शामिल होने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 20% सांसदों (MPs) का समर्थन मिलना जरूरी है। Starmer ने पहले इस लड़ाई को लड़ने की बात कही थी, लेकिन मंत्रियों के साथ चर्चा और विचार-विमर्श के बाद उन्होंने इस्तीफा देना ही बेहतर समझा।

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे कुछ मुख्य कारण रहे हैं। नवंबर 2025 तक Starmer की लोकप्रियता रेटिंग गिरकर -46% तक पहुंच गई थी, जो 1977 के बाद से किसी भी प्रधानमंत्री के लिए सबसे कम है। साथ ही, 2025 और 2026 के स्थानीय चुनावों में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा। Nigel Farage की Reform UK पार्टी से बढ़ते खतरे ने भी Labour सांसदों की चिंता बढ़ा दी थी।

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस मामले पर टिप्पणी की और Starmer के इस्तीफे की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने खासतौर पर प्रवासन (immigration) और ऊर्जा नीतियों को लेकर Starmer की आलोचना की थी। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि पार्टी कितनी जल्दी नया नेता चुनती है ताकि जनता के बीच गिरती साख को बचाया जा सके।