Maharashtra में शिवसेना (UBT) में बड़ी बगावत, उद्धव ठाकरे ने कहा- भरोसा नहीं तो छोड़ दूंगा पार्टी चीफ का पद

Maharashtra: शिवसेना (UBT) के अंदर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर उद्धव ठाकरे ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर पार्टी के सदस्य अब उनके नेतृत्व पर भरोसा नहीं करते हैं, तो वह पार्टी

Maharashtra: शिवसेना (UBT) के अंदर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के 60वें स्थापना दिवस के मौके पर उद्धव ठाकरे ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि अगर पार्टी के सदस्य अब उनके नेतृत्व पर भरोसा नहीं करते हैं, तो वह पार्टी अध्यक्ष के पद से हटने को तैयार हैं। यह बात उन्होंने तब कही जब पार्टी के कई सांसद उनके खिलाफ बगावत कर चुके हैं।

मामला तब बिगड़ा जब 18 जून 2026 को दिल्ली में हुई पार्टी की एक जरूरी मीटिंग में 9 में से 6 सांसद नहीं पहुंचे। इन सांसदों में संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टिकर और ओमप्रकाश राजे निंबालकर शामिल थे। पार्टी ने इन सभी सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और उन्हें 7 दिन का समय दिया है, जिसके बाद उन्हें अयोग्य घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

उद्धव ठाकरे ने भावुक होते हुए कहा कि वह शिवसेना को गद्दारों और चोरों के हाथ में नहीं जाने देंगे। उन्होंने उन सांसदों के खिलाफ नाराजगी जताई जिन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में शिवसेना (UBT) के टिकट पर जीत हासिल की थी और अब पार्टी छोड़ रहे हैं। ठाकरे ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि उनकी पार्टी कांग्रेस में विलय होने वाली है। उन्होंने सवाल किया कि जब 30 साल तक बीजेपी के साथ रहने के बाद भी विलय नहीं हुआ, तो अब कांग्रेस के साथ ऐसा क्यों होगा।

दूसरी तरफ, संजय राउत ने आरोप लगाया कि बगावत करने वाले सांसदों को 25 करोड़ रुपये का लालच दिया गया है और वे राजस्थान में पुलिस सुरक्षा के बीच रुके हुए हैं। वहीं, एकनाथ शिंदे गुट ने इस पूरे घटनाक्रम पर तंज कसते हुए कहा कि यह तो सिर्फ ट्रेलर है, पूरी फिल्म अभी बाकी है। हालांकि, शिंदे गुट ने फिलहाल इन सांसदों को अपनी पार्टी में शामिल करने की खबरों से इनकार किया है।

इस राजनीतिक खींचतान के बीच मुंबई पुलिस को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि दोनों गुटों के बीच कोई टकराव न हो। बगावत करने वाले सांसदों को सुरक्षा कारणों से ‘Y-Plus’ सिक्योरिटी दी गई है। इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर खुद को एक अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है, उनका कहना है कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है।