UAE और UK के बीच व्यापार 30 अरब डॉलर के पार, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की बातचीत पूरी
Finance : संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच सालाना व्यापार 30 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। यह बड़ी उपलब्धि ऐसे समय पर आई है जब दोनों पक्षों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर चल रही ब
Finance : संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच सालाना व्यापार 30 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है। यह बड़ी उपलब्धि ऐसे समय पर आई है जब दोनों पक्षों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लेकर चल रही बातचीत पूरी हो गई है। इस समझौते से आने वाले समय में सामान और सेवाओं के लेन-देन में और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
UK और गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC), जिसमें UAE भी शामिल है, के बीच इस समझौते पर 20 मई 2026 को लंदन में सहमति बनी। यह बातचीत UK के ट्रेड पॉलिसी मंत्री सर क्रिस ब्रायंट और GCC के महासचिव जसემ मोहम्मद अल्बुदईवी के बीच हुई। हालांकि, यह समझौता अभी राजनीतिक तौर पर पूरा हुआ है, लेकिन इसे पूरी तरह लागू होने के लिए कानूनी कागजी कार्रवाई और दोनों देशों की सरकारों की मंजूरी मिलना बाकी है।
इस डील का सबसे बड़ा असर टैक्स और ड्यूटी में कमी के रूप में दिखेगा। समझौते के लागू होने के बाद GCC देश 10 साल के भीतर अपनी 90% टैरिफ लाइनों को पूरी तरह उदार बना देंगे। इससे UK से होने वाले निर्यात पर लगने वाले टैक्स में भारी कमी आएगी, जिससे व्यापार करना आसान और सस्ता हो जाएगा।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कुल सालाना व्यापार | 30 अरब डॉलर से अधिक |
| UK एक्सपोर्टर्स की संख्या | 14,000 से ज्यादा |
| समझौते की तारीख | 20 मई 2026 |
| UK अर्थव्यवस्था को लाभ | सालाना करीब 3.7 अरब पाउंड की बढ़ोतरी |
| ट्रेड ग्रोथ अनुमान | UK और GCC व्यापार में करीब 20% की वृद्धि |
| टैक्स में छूट | UK के लिए GCC के 93% निर्यात पर टैक्स हटेगा |
UAE के राजदूत मंसूर अबुलहौल ने कहा कि UAE खुले और नियमों पर आधारित व्यापार के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, बद्र जाफर ने जोर दिया कि अब ध्यान तकनीक, टैलेंट और मार्केट एक्सेस को तेजी से लागू करने पर होना चाहिए। UK सरकार के मुताबिक, यह GCC द्वारा किसी भी G7 देश के साथ किया गया पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है।
हाल ही में UAE-UK बिजनेस काउंसिल की एक मीटिंग में यह साफ किया गया कि अब प्राथमिकता व्यापार की बाधाओं को कम करने और निवेशकों का भरोसा बढ़ाने पर होगी। इससे आने वाले समय में दोनों देशों के बीच कमर्शियल पार्टनरशिप और मजबूत होगी।