UAE से तेल निर्यात में भारी बढ़ोत्तरी, Strait of Hormuz में हालात सुधरने से वैश्विक बाजार को राहत
Finance: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से होने वाले तेल निर्यात में एक बार फिर तेजी आई है। Strait of Hormuz के जरिए जहाजों की आवाजाही बेहतर होने से अब तेल की सप्लाई फिर से पुराने स्तर पर पहुंच गई है। यह रिकवरी जून और जुलाई 20
Finance: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से होने वाले तेल निर्यात में एक बार फिर तेजी आई है। Strait of Hormuz के जरिए जहाजों की आवाजाही बेहतर होने से अब तेल की सप्लाई फिर से पुराने स्तर पर पहुंच गई है। यह रिकवरी जून और जुलाई 2026 की शुरुआत में देखी गई, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।
क्षेत्रीय तनाव के कारण फरवरी 2026 के आसपास तेल निर्यात में बड़ी गिरावट आई थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। UAE ने 1 मई 2026 को OPEC से अलग होने का फैसला किया था, जिससे उसे अपने तेल उत्पादन और निर्यात की रणनीति खुद तय करने की आजादी मिली। अब अबू धाबी से होने वाली सप्लाई युद्ध से पहले के स्तर को पार कर गई है।
निर्यात से जुड़े मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:
| विवरण | आंकड़े (प्रति दिन) |
|---|---|
| जून 2026 औसत निर्यात | लगभग 3.7 मिलियन बैरल (bpd) |
| युद्ध से पहले का औसत निर्यात | 3.1 से 3.3 मिलियन बैरल (bpd) |
| अबू धाबी क्रूड लोडिंग (जून 1-29) | लगभग 4 मिलियन बैरल (bpd) |
| युद्ध से पहले की लोडिंग | लगभग 3.4 मिलियन बैरल (bpd) |
UAE के अमेरिका में राजदूत Yousef Al Otaiba ने बताया कि देश रिकॉर्ड स्तर पर तेल निर्यात कर रहा है। वहीं, विदेश व्यापार मंत्री Dr. Thani Al Zeyoudi ने कहा कि UAE अब Strait of Hormuz पर अपनी निर्भरता पूरी तरह खत्म करना चाहता है। इसके लिए डिब्बा, फुजैराह और खोर फक्कन जैसे बंदरगाहों का विस्तार किया जा रहा है और नए पाइपलाइन व रेल नेटवर्क बनाए जा रहे हैं।
ADNOC ने भी इस रिकवरी में बड़ी भूमिका निभाई है। कंपनी ने अपने खुद के जहाजों और शटल सिस्टम का इस्तेमाल किया ताकि रिस्क के समय भी तेल की सप्लाई न रुके। इसके अलावा, Habshan-to-Fujairah पाइपलाइन और Mandous अंडरग्राउंड स्टोरेज की वजह से UAE बिना Strait of Hormuz का इस्तेमाल किए भी तेल भेज पाया।
गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) जैसी संस्थाओं का मानना है कि जैसे-जैसे हालात सामान्य होंगे, वैश्विक तेल बाजार में फिर से सरप्लस (अधिकता) आएगी। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते के बाद तेल की कीमतों में भी कमी आई है और ये अब युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई हैं।