Middle East में तनाव बढ़ा, ईरान के मिसाइल हमलों के बाद UAE ने जताई कड़ी नाराजगी

World : मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं, जिसके बाद UAE ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। UAE सरकार ने इन देशों के प्रति अपना पूरा सम

World : मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं, जिसके बाद UAE ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। UAE सरकार ने इन देशों के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया है और चेतावनी दी है कि इस तरह के हमलों से पूरे क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।

ताजा जानकारी के मुताबिक, 18 जुलाई 2026 को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली। ईरान का दावा है कि उसने कुवैत के अली अल सलेम एयर बेस, जॉर्डन के मुवाफ़ाक साल्टी एयर बेस और बहरीन के शेख ईसा एयर बेस पर मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और गोला-बारूद के भंडारों को निशाना बनाया है। ईरान ने इन हमलों को अमेरिका द्वारा किए गए हमलों का बदला बताया है।

इन हमलों का असर अलग-अलग देशों में अलग रहा। कुवैत में एक बिजली और पानी के प्लांट पर सीधा हमला हुआ, जिससे बिजली उत्पादन की कई यूनिट बंद हो गईं और मलबे की चपेट में आने से कुछ सैनिक घायल हो गए। वहीं जॉर्डन की सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए 10 बैलिस्टिक मिसाइलें और 4 ड्रोन मार गिराए, जिससे वहां कोई जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। बहरीन के एयर डिफेंस सिस्टम ने भी कई हवाई हमलों को नाकाम कर दिया।

UAE के विदेश मंत्रालय (MoFA) ने इसे इन देशों की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताया है। राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गर्गाश ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा के लिए परमाणु खतरों, मिसाइलों और ड्रोन के बढ़ते चलन को रोकना जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह संघर्ष बढ़ता है, तो यह पूरे इलाके की स्थिति को और जटिल बना देगा।

ईरान की तरफ से भी कड़ी चेतावनी आई है। सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहसिन रज़ाई ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमले जारी रखे, तो तेहरान बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। इस पूरे घटनाक्रम से यह डर बढ़ गया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।