Trump का बड़ा फैसला, Hormuz जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर लगेगा 20% शुल्क, बढ़ सकते हैं तेल के दाम
World: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20% शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। इस फैसले के साथ ही उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी (blockade) को फिर से
World: अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20% शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है। इस फैसले के साथ ही उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी (blockade) को फिर से शुरू करने की पुष्टि की है। इस खबर के बाद दुनिया भर के शिपिंग और एनर्जी मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर आने वाले समय में तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
President Trump ने Truth Social और Fox News को दिए इंटरव्यू में कहा कि यह शुल्क ‘फेयरनेस’ के तौर पर लिया जाएगा। उन्होंने तर्क दिया कि दुनिया के इस संवेदनशील हिस्से में सुरक्षा और सेफ्टी बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना जरूरी है। ट्रंप ने साफ किया कि यह नाकेबंदी खास तौर पर ईरानी जहाजों और उनके ग्राहकों को रोकने के लिए है, जबकि बाकी देशों के लिए रास्ता खुला और सुरक्षित रहेगा।
यह पूरा मामला अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की बातचीत टूटने के बाद सामने आया है। इससे पहले 13 अप्रैल 2026 को भी नाकेबंदी लगाई गई थी, जिसे जून के मध्य में एक समझौते (MoU) के बाद हटा लिया गया था। उस समय ट्रंप ने कहा था कि यह रास्ता हमेशा के लिए टोल-फ्री रहेगा, लेकिन अब वह समझौता खत्म हो गया है।
दूसरी तरफ ईरान ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। ईरान के संसद स्पीकर Mohammad-Bagher Ghalibaf ने कहा कि Hormuz जलमार्ग केवल ईरान की शर्तों पर खुलेगा, अमेरिकी धमकियों से नहीं। ईरान की ‘Strait Authority’ ने 13 जुलाई 2026 को इस रास्ते को फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया है।
इस विवाद में अन्य देशों की स्थिति इस प्रकार है:
- Oman: ओमान ने साफ तौर पर कहा है कि वह ट्रांजिट फीस का समर्थन नहीं करता और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जहाजों के गुजरने का अधिकार सुरक्षित होना चाहिए।
- यूरोपीय देश: यूरोपीय अधिकारी अनिवार्य टोल के खिलाफ हैं, हालांकि वे सेवाओं के लिए गैर-अनिवार्य शुल्क के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं।
- Qatar: कतर अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है।
इस तनाव का सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ेगा। चूंकि यह रास्ता तेल के व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए भारत जैसे देशों में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका असर दिख सकता है।