Maharashtra: ठाणे में बनने वाली 12,200 करोड़ रुपये की इंटीग्रल रिंग मेट्रो रेल (TIRMR) परियोजना अब विवादों में घिर गई है। शहर के परिवहन विशेषज्ञों और शहरी योजनाकारों के एक समूह ने सरकार से इस प्रोजेक्ट की फिर से जांच करन
Maharashtra: ठाणे में बनने वाली 12,200 करोड़ रुपये की इंटीग्रल रिंग मेट्रो रेल (TIRMR) परियोजना अब विवादों में घिर गई है। शहर के परिवहन विशेषज्ञों और शहरी योजनाकारों के एक समूह ने सरकार से इस प्रोजेक्ट की फिर से जांच करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस प्रोजेक्ट की प्लानिंग में बड़ी गलतियां हैं और इससे पर्यावरण को भारी नुकसान होगा।
मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर क्या हैं मुख्य आपत्तियां?
Citizens for Sustainable Transport (CST-Thane) और Thane Green Collective जैसे समूहों ने इस प्रोजेक्ट को सरकारी पैसे की बर्बादी बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ठाणे में लोगों के आने-जाने का तरीका रेडियल है, न कि सर्कुलर, इसलिए इतनी भारी मेट्रो की जरूरत नहीं है। इसके अलावा, रूट मैप को ‘रोलर कोस्टर राइड’ जैसा बताया गया है क्योंकि इसमें 29 किलोमीटर के दायरे में 82 मोड़ हैं, जिससे मेंटेनेंस का खर्च बढ़ेगा।
पर्यावरण और ट्रैफिक पर क्या होगा असर?
पेड़ों की कटाई को लेकर आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया है। जहाँ MahaMetro ने 662 पेड़ों के कटने का अनुमान लगाया था, वहीं नगर निगम के ट्री अथॉरिटी ने 3,224 पेड़ों की पहचान की है। साथ ही, ठाणे क्रीक के पास मैंग्रोव को होने वाले नुकसान और रेलवे स्टेशन के पास अंडरग्राउंड काम की वजह से लंबे समय तक ट्रैफिक जाम रहने का डर है। समूह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से काम रोकने और टेंडर प्रक्रिया को स्थगित करने की अपील की है।
प्रोजेक्ट की अब तक की प्रगति और सरकारी स्थिति
इस प्रोजेक्ट को केंद्र और राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है और इसका खर्च दोनों सरकारें आधा-आधा उठाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2024 में इसकी आधारशिला रखी थी और अप्रैल 2026 तक घोडबंदर में सिविल काम शुरू हो चुका था। हालांकि, बीजेपी विधायक संजय केलकर ने माना है कि प्रोजेक्ट जरूरी है, लेकिन स्थानीय लोगों की चिंताओं को दूर करना भी आवश्यक है। इस प्रोजेक्ट के 2029 तक पूरा होने की उम्मीद है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ठाणे रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है और इसे कौन बना रहा है?
इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 12,200.10 करोड़ रुपये है। इसे महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MahaMetro) द्वारा लागू किया जा रहा है, जिसका खर्च केंद्र और महाराष्ट्र सरकार मिलकर उठा रही हैं।
विशेषज्ञों ने इस मेट्रो को अव्यवहारिक क्यों बताया है?
विशेषज्ञों के अनुसार, 2050 तक पीक ऑवर में यात्रियों की संख्या 28,000 रहने का अनुमान है, जबकि भारी मेट्रो सिस्टम के लिए कम से कम 30,000 से 50,000 यात्रियों की जरूरत होती है।