Maharashtra: ठाणे की एक अदालत ने 2022 के एक POCSO मामले में 35 साल के व्यक्ति को बरी कर दिया है। उस पर एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न और पीछा करने का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि लड़की ने अलग-अलग समय पर जो बातें कहीं,
Maharashtra: ठाणे की एक अदालत ने 2022 के एक POCSO मामले में 35 साल के व्यक्ति को बरी कर दिया है। उस पर एक नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न और पीछा करने का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि लड़की ने अलग-अलग समय पर जो बातें कहीं, उनमें काफी अंतर था, इसलिए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया।
कोर्ट ने बरी करने के क्या कारण बताए?
अदालत ने देखा कि पीड़िता ने कोर्ट में जो गवाही दी, उसकी शुरुआती शिकायत और Section 164 के तहत दर्ज बयान में काफी विरोधाभास था। मामला एक भीड़भाड़ वाली बिल्डिंग का था, लेकिन पुलिस कोई भी स्वतंत्र गवाह पेश नहीं कर पाई। इसके अलावा, लड़की ने दावा किया था कि उसने संघर्ष के दौरान आरोपी को काटा था, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में इसका कोई सबूत नहीं मिला।
पुलिस की जांच में क्या कमियां रहीं?
कोर्ट ने माना कि पुलिस की जांच अधूरी थी। आरोपी पर मैसेज भेजकर पीछा करने का आरोप था, लेकिन पुलिस ने जांच के लिए उसका फोन जब्त नहीं किया। जब बुनियादी तथ्य साबित नहीं हुए, तो POCSO एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी धारणाओं का इस्तेमाल नहीं किया जा सका। इस पूरे ट्रायल के दौरान आरोपी 23 दिन जेल में रहा था।
अब आगे क्या होगा?
बरी करने के आदेश के बाद, अदालत ने आरोपी के बेल बॉन्ड को रद्द कर दिया है और उसके जमानती को डिस्चार्ज कर दिया है। कोर्ट ने साफ किया कि यौन अपराधों के मामलों में गवाही ऐसी होनी चाहिए जिसमें सच्चाई साफ दिखे, लेकिन इस मामले में बयानों में अंतर होने की वजह से गवाही भरोसेमंद नहीं लगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
आरोपी को बरी क्यों किया गया?
आरोपी को इसलिए बरी किया गया क्योंकि पीड़िता के बयानों में काफी अंतर था और पुलिस कोई स्वतंत्र गवाह या मेडिकल सबूत पेश नहीं कर पाई।
पुलिस की जांच में क्या गलती हुई?
पुलिस ने मैसेज के आरोपों की जांच के लिए आरोपी का फोन जब्त नहीं किया और न ही कोई ठोस सबूत जुटाया।