Maharashtra: ठाणे और नवी मुंबई के आठ महत्वपूर्ण जल निकायों को ‘वेटलैंड’ (आर्द्रभूमि) का दर्जा नहीं मिला है। जिला वेटलैंड कमेटी की ताजा रिपोर्ट के बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा है। उनका कहना है कि
Maharashtra: ठाणे और नवी मुंबई के आठ महत्वपूर्ण जल निकायों को ‘वेटलैंड’ (आर्द्रभूमि) का दर्जा नहीं मिला है। जिला वेटलैंड कमेटी की ताजा रिपोर्ट के बाद पर्यावरण कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा है। उनका कहना है कि इन जलाशयों को सुरक्षा न देना प्रकृति और खासकर फ्लेमिंगो पक्षियों के लिए बड़ा खतरा है।
कमेटी ने दर्जा देने से क्यों किया इनकार?
ठाणे जिला वेटलैंड कमेटी ने 1 मई 2026 को अपनी रिपोर्ट जारी की। कमेटी ने कहा कि ये जल निकाय Wetlands (Conservation and Management) Rules, 2017 के नियमों पर खरे नहीं उतरते। पैनल ने तर्क दिया कि ये जगहें कृत्रिम हैं और यहां पहले से ही डेवलपमेंट प्लानिंग चल रही है, इसलिए इन्हें वेटलैंड का दर्जा नहीं दिया जा सकता।
किन जलाशयों पर है विवाद और क्या है असर?
विवाद में NRI, T S Chanakya, Lotus Lake, Jewel of Navi Mumbai और DPS Flamingo Lake जैसे महत्वपूर्ण जल निकाय शामिल हैं। NatConnect Foundation और NMEPS जैसे संगठनों का कहना है कि कमेटी ने CIDCO की बातों को ज्यादा अहमियत दी और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट को नजरअंदाज किया। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि प्रदूषण और सीवेज के कारण इन फ्लेमिंगो आवासों की हालत खराब हो रही है और पानी जहरीला हो चुका है।
विशेषज्ञों और कोर्ट की क्या राय है?
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि Ramsar Convention के मुताबिक प्राकृतिक और कृत्रिम दोनों तरह के जल निकायों को वेटलैंड माना जाता है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी पहले T S Chanakya के पास वाली झील को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील बताया था। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2024 में राज्यों को निर्देश दिया था कि वे वेटलैंड अथॉरिटी बनाएं और ऐसी जगहों को अधिसूचित करें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
किन जल निकायों को वेटलैंड का दर्जा नहीं मिला?
ठाणे और नवी मुंबई के 8 जल निकायों को दर्जा नहीं मिला, जिनमें मुख्य रूप से NRI, T S Chanakya, Lotus Lake, Jewel of Navi Mumbai और DPS Flamingo Lake शामिल हैं।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं की मुख्य आपत्ति क्या है?
कार्यकर्ताओं का कहना है कि कमेटी ने Ramsar Convention की परिभाषा को नजरअंदाज किया और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के बजाय CIDCO के इनपुट पर भरोसा किया।