Maharashtra: ठाणे की एक विशेष अदालत ने लूट के मामले में MCOCA जैसे सख्त कानून के तहत आरोपी दो लोगों को बरी कर दिया है। यह फैसला जज V G Mohite ने शुक्रवार (9 मई 2026) को सुनाया। मामला साल 2022 का है जब कल्याण इलाके में एक
Maharashtra: ठाणे की एक विशेष अदालत ने लूट के मामले में MCOCA जैसे सख्त कानून के तहत आरोपी दो लोगों को बरी कर दिया है। यह फैसला जज V G Mohite ने शुक्रवार (9 मई 2026) को सुनाया। मामला साल 2022 का है जब कल्याण इलाके में एक महिला की सोने की चेन छीनी गई थी।
अदालत ने आरोपियों को बरी क्यों किया?
कोर्ट ने पाया कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं कर पाई। जज V G Mohite ने कहा कि यह साबित नहीं हो पाया कि यह अपराध किसी संगठित गिरोह का हिस्सा बनकर पैसों के फायदे के लिए किया गया था। साथ ही, आरोपियों की पहचान के लिए जो TIP (टेस्ट आइडेंटिफिकेशन परेड) की गई थी, वह नियमों के मुताबिक नहीं थी, जिससे उनकी पहचान संदिग्ध हो गई।
सबूतों में क्या कमी रही
मामले में पुलिस ने जो चोरी का सामान बरामद करने का दावा किया था, वह भी साबित नहीं हो सका। गवाही देने आए ‘पंच’ यानी गवाह अदालत में मुकर गए, जिससे बरामदगी का दावा कमजोर पड़ गया। कोर्ट ने साफ किया कि जब लूट (IPC की धारा 392) का मुख्य अपराध ही साबित नहीं हुआ, तो MCOCA जैसे कड़े कानून को लागू नहीं किया जा सकता।
कौन थे आरोपी और क्या था केस
इस मामले में जयकुमार कोमल राठौड़ और गाजी दारा ईरानी उर्फ सय्यद को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने इन पर संगठित अपराध का आरोप लगाया था, लेकिन कोर्ट ने माना कि सिर्फ पुराने केस या चार्जशीट होने से किसी को संगठित अपराधी नहीं माना जा सकता जब तक कि वर्तमान अपराध साबित न हो जाए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यह मामला किस घटना से जुड़ा था?
यह मामला 11 सितंबर 2022 का है, जिसमें ठाणे जिले के कल्याण इलाके में एक महिला की सोने की चेन छीनने का आरोप था।
कोर्ट ने MCOCA के आरोपों को क्यों खारिज किया?
कोर्ट ने पाया कि लूट का प्राथमिक अपराध साबित नहीं हुआ और न ही यह साबित हुआ कि आरोपी किसी संगठित अपराध सिंडिकेट का हिस्सा थे।