Mumbai की 1.2 लाख सैलरी से बेहतर hometown के 40 हजार, Techie ने बताया छोटे शहर में रहने का फायदा

Finance : आजकल लोग ज्यादा सैलरी के चक्कर में बड़े शहरों की तरफ भागते हैं, लेकिन क्या वाकई ज्यादा पैसा बेहतर जिंदगी की गारंटी है। एक टेक प्रोफेशनल शुभ जैन ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि मुंबई जैसे बड़े शहर में लाखों

Finance : आजकल लोग ज्यादा सैलरी के चक्कर में बड़े शहरों की तरफ भागते हैं, लेकिन क्या वाकई ज्यादा पैसा बेहतर जिंदगी की गारंटी है। एक टेक प्रोफेशनल शुभ जैन ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि मुंबई जैसे बड़े शहर में लाखों कमाने के बाद भी वह उतना अमीर महसूस नहीं कर रहे थे, जितना अपने छोटे शहर में कम सैलरी में कर रहे हैं।

शुभ जैन ने X (ट्विटर) पर लिखा कि मुंबई में उनकी महीने की कमाई करीब 1.2 लाख रुपये थी, लेकिन वहां के महंगे खर्चों और भागदौड़ भरी जिंदगी की वजह से यह रकम कभी भी पर्याप्त नहीं लगी। जब वह अपने होमटाउन लौटे, तो उनकी शुरुआती सैलरी घटकर 40,000 रुपये रह गई, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अपनी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर महसूस होने लगी।

शुभ ने बताया कि छोटे शहर में रहने से उन्हें कई फायदे मिले। वह अपने परिवार और पालतू जानवरों के साथ समय बिता पा रहे हैं, घर का बना खाना खा रहे हैं और उनके पास रहने के लिए ज्यादा जगह है। साथ ही, रोजमर्रा के खर्च कम होने की वजह से अब वह ज्यादा बचत कर पा रहे हैं। उन्होंने माना कि मुंबई ने उन्हें प्रोफेशनली आगे बढ़ने में मदद की, लेकिन छोटे शहर ने उनकी जिंदगी को फिर से सुकून भरा बना दिया।

2026 के आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई भारत का सबसे महंगा शहर बना हुआ है। यहाँ रहने का खर्च अन्य शहरों के मुकाबले काफी ज्यादा है।

विवरण Tier-1 शहर (जैसे मुंबई) Tier-2/3 शहर (जैसे इंदौर, जयपुर)
महीने का खर्च (बिना रेंट) ₹30,000 से ₹60,000 ₹20,000 से ₹40,000
1BHK/2BHK का किराया ₹25,000 से ₹50,000+ ₹8,000 से ₹20,000
सैलरी का अंतर 30-50% ज्यादा तुलनात्मक रूप से कम

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े शहरों में सैलरी ज्यादा जरूर होती है, लेकिन भारी किराया, लंबा सफर और मानसिक तनाव के कारण लोगों की बचत कम हो जाती है। इसके उलट छोटे शहरों में पैसा ज्यादा टिकता है और वर्क-लाइफ बैलेंस बेहतर रहता है।