West Bengal के सागर आइलैंड पर स्विस महिला का कमाल, दुबई की लग्जरी छोड़ बच्चों के लिए खोला फ्री स्कूल
West Bengal: स्विट्जरलैंड की रहने वाली Sandra Lavie Gojkovic ने दुनिया को हैरान करने वाला फैसला लिया। करीब 15 साल पहले उन्होंने दुबई की अपनी हाई-पेइंग कॉर्पोरेट नौकरी, आलीशान अपार्टमेंट और आरामदायक जिंदगी को पूरी तरह छोड
West Bengal: स्विट्जरलैंड की रहने वाली Sandra Lavie Gojkovic ने दुनिया को हैरान करने वाला फैसला लिया। करीब 15 साल पहले उन्होंने दुबई की अपनी हाई-पेइंग कॉर्पोरेट नौकरी, आलीशान अपार्टमेंट और आरामदायक जिंदगी को पूरी तरह छोड़ दिया। वह सिर्फ दो शर्ट और दो पैंट लेकर भारत आईं ताकि सादगी से जी सकें और उन लोगों की मदद कर सकें जिनके पास बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं।
Sandra पश्चिम बंगाल के सुदूर सागर आइलैंड के गांवों में पहुंचीं, जहां पहुंचना काफी मुश्किल है। यहां ट्रेन और नाव के लंबे सफर के बाद ही जाया जा सकता है। उन्होंने देखा कि कई संस्थाओं में पैसों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा था, इसलिए उन्होंने खुद का एक पारदर्शी प्रोजेक्ट शुरू किया। विदेशी होने के कारण शुरू में लोगों का भरोसा जीतना मुश्किल था, इसलिए वह घर-घर गईं और माता-पिता को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए मनाया।
Sandra के इस प्रयास से अब स्थानीय स्तर पर बड़ा बदलाव दिख रहा है। उनके संगठन द्वारा किए जा रहे कामों की जानकारी नीचे दी गई है:
- एक फ्री प्राइमरी स्कूल चलाया जा रहा है, जहां पांच क्लास के 150 बच्चे पढ़ते हैं।
- सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 120 अन्य बच्चों को ट्यूशन और पौष्टिक खाना दिया जाता है।
- आर्थिक आजादी के लिए 20 महिलाओं को सिलाई और व्यावसायिक ट्रेनिंग दी जा रही है।
- घरेलू हिंसा, बाल विवाह और मानव तस्करी जैसे मुद्दों पर जागरूकता फैलाई जा रही है।
Sandra का मानना है कि असली बदलाव गांवों से ही शुरू होता है। उन्होंने बताया कि भौतिक सुख-सुविधाओं से उन्हें कभी मानसिक शांति नहीं मिली, बल्कि दूसरों की सेवा करने और उनके लिए अवसर पैदा करने से उन्हें जीवन का असली मकसद मिला। Times of India और Global Trend Post की रिपोर्ट के अनुसार, वह आज भी सागर आइलैंड पर शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रही हैं।