Delhi, Lucknow में अवैध इमारतों पर SC सख्त, अधिकारियों को 4 अगस्त को कोर्ट में पेश होने का आदेश
Delhi/Lucknow: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और लखनऊ में अवैध निर्माण के खिलाफ ढिलाई बरतने वाले नगर निगमों और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा है कि राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में बिना अनुमति बनी इमारतों
Delhi/Lucknow: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और लखनऊ में अवैध निर्माण के खिलाफ ढिलाई बरतने वाले नगर निगमों और अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ कहा है कि राजधानी और उसके आसपास के इलाकों में बिना अनुमति बनी इमारतों पर कार्रवाई करने में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कोर्ट ने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अगर आदेशों का पालन नहीं हुआ तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है।
यह मामला दिल्ली के मालवीय नगर में 3 जून 2026 और लखनऊ में 22 जून 2026 को लगी आग की घटनाओं के बाद गरमाया है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने कहा कि अधिकारी केवल बिल्डरों को गिरफ्तार करके अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं, जबकि उन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती जिन्होंने इन अवैध निर्माणों को मंजूरी दी या अनदेखा किया।
कोर्ट ने पाया कि एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) सीनियर एडवोकेट अजीत सिन्हा की रिपोर्ट के अनुसार, अवैध निर्माणों को दो हफ्ते में गिराने का आदेश था, लेकिन अधिकारियों ने सिर्फ नोटिस जारी किए और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इस लापरवाही को देखते हुए कोर्ट ने MCD, गुरुग्राम और लखनऊ के संबंधित अधिकारियों को 4 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है।
दिल्ली के लिए कोर्ट ने एक विशेष सर्वे टीम बनाने का आदेश दिया है। इस टीम में IIT Delhi के दो सीनियर प्रोफेसर, दो ड्राफ्ट्समैन, MCD के अधिकारी और एमिकस क्यूरी के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह टीम मालवीय नगर, साकेत, लाजपत नगर और सरोजिनी नगर जैसे इलाकों का सर्वे करेगी ताकि अवैध निर्माणों की पहचान की जा सके।
इसके अलावा, कोर्ट ने गुरुग्राम की एक रिपोर्ट पर भी चिंता जताई जिसमें बताया गया कि वहां 93% व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में फायर सेफ्टी के इंतजाम नहीं हैं। यह जांच अब केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि मार्च 2026 से इसे पूरे देश में फैला दिया गया है, जिसमें पटना और तमिलनाडु के नगर निकायों को भी फटकार लगाई गई है।