Delhi: दिल्ली बार काउंसिल (BCD) के चुनावों में वोटों की गिनती पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह फैसला सोमवार, 18 मई 2026 को लिया गया क्योंकि चुनाव में मतपत्रों (ballots) के साथ छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे थे। कोर्ट ने
Delhi: दिल्ली बार काउंसिल (BCD) के चुनावों में वोटों की गिनती पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। यह फैसला सोमवार, 18 मई 2026 को लिया गया क्योंकि चुनाव में मतपत्रों (ballots) के साथ छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे थे। कोर्ट ने अब इस पूरे मामले को दिल्ली हाई कोर्ट भेज दिया है ताकि जल्द से जल्द सच्चाई सामने आ सके।
वोटों की गिनती क्यों रुकी और अब क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्या कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने आदेश दिया कि जब तक दिल्ली हाई कोर्ट अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक वोटों की गिनती बंद रहेगी। कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध किया है कि वे इस हफ्ते के भीतर एक स्पेशल बेंच बनाएं, जो इस विवाद की सुनवाई हर दिन करे। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि उसने छेड़छाड़ के आरोपों पर अपनी कोई राय नहीं दी है, बल्कि यह तय करना हाई कोर्ट का काम होगा।
धांधली के क्या हैं आरोप और क्या हुई कार्रवाई?
याचिकाकर्ताओं की वकील शोभा गुप्ता ने कोर्ट को बताया कि मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया खतरे में है। जांच में यह बात सामने आई कि कुछ मतपत्रों पर दूसरी पसंद (second preference) के वोटों को बदला गया। इसमें ‘2’ से पहले ‘1’ लिखकर उसे ’12’ बना दिया गया और फिर किसी खास उम्मीदवार के सामने नया ‘2’ लिख दिया गया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के तहत FIR भी दर्ज की है।
जांच में क्या अहम सबूत दिए गए हैं?
इस मामले में पूर्व हाई कोर्ट जज जस्टिस तलवंत सिंह ने 2 मई को एक सीलबंद पत्र लिखा था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि इस पत्र को दोबारा सील करके सीधे दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा जाए। यह पत्र चुनाव प्रक्रिया की खामियों को समझने में मददगार साबित होगा। बता दें कि फरवरी में वोटिंग हुई थी और गिनती 7 मार्च 2026 से शुरू हुई थी, जिस पर अब रोक लग गई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली बार काउंसिल चुनाव की गिनती पर रोक क्यों लगी?
वोटों की गिनती में धांधली और मतपत्रों (ballot papers) के साथ छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 18 मई 2026 को इस पर रोक लगा दी।
अब इस मामले की सुनवाई कहाँ होगी?
सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे विवाद को दिल्ली हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया है और एक स्पेशल बेंच बनाकर दिन-प्रतिदिन सुनवाई करने को कहा है।