Delhi सरकार को झटका, बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
Delhi: दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों के ऑडिट को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में दिल्ली सरकार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह पूरा विवाद करीब 38,500 करोड़
Delhi: दिल्ली की बिजली वितरण कंपनियों के ऑडिट को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में दिल्ली सरकार को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह पूरा विवाद करीब 38,500 करोड़ रुपये के रेगुलेटरी एसेट्स (RA) से जुड़ा है, जिसे उपभोक्ताओं से वसूला जाना है।
मामला शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) द्वारा CAG को नियुक्त करने की कानूनी वैधता की जांच जरूरी है। इससे पहले गुरुवार, 2 जुलाई को दिल्ली सरकार ने BRPL, BYPL और TPDDL जैसी निजी कंपनियों के सख्त ऑडिट का आदेश जारी किया था।
इस मामले से जुड़ी मुख्य जानकारियां नीचे दी गई टेबल में देखें:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रभावित कंपनियां | BRPL, BYPL और TPDDL |
| विवादित राशि | करीब 38,500 करोड़ रुपये (Regulatory Assets) |
| कोर्ट का फैसला | CAG ऑडिट पर अंतरिम रोक |
| अगली सुनवाई | 15 जुलाई 2026 |
| मुख्य कानूनी बिंदु | CAG की नियुक्ति की वैधता पर सवाल |
| प्रतिनिधित्व | सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता (DERC) और वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एम. सिंघवी (डिस्कॉम) |
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 6 अगस्त 2025 के उस निर्देश पर आधारित था, जिसमें नियामक परिसंपत्तियों की वसूली के बिना काम करने की परिस्थितियों के गहन ऑडिट की बात कही गई थी। हालांकि, अपीलीय न्यायाधिकरण फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL) ने पहले ही कहा था कि CAG ऑडिट वैधानिक ढांचे के खिलाफ है और इसकी जगह स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति होनी चाहिए। दिल्ली के बिजली मंत्री आशीष सूद ने पहले इस ऑडिट को पारदर्शिता के लिए ऐतिहासिक बताया था, लेकिन अब कोर्ट के स्टे के बाद मामला फिर से सुनवाई के लिए 15 जुलाई को जाएगा।