1993 मुंबई ब्लास्ट केस: अबू सलेम की समय से पहले रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

Maharashtra: 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषी Abu Salem की जेल से समय से पहले रिहाई की अर्जी पर Supreme Court ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अबू सलेम का दावा है कि वह अपनी उम्रकैद की सजा के 25 साल पूरे कर च

Maharashtra: 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले के दोषी Abu Salem की जेल से समय से पहले रिहाई की अर्जी पर Supreme Court ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अबू सलेम का दावा है कि वह अपनी उम्रकैद की सजा के 25 साल पूरे कर चुका है, इसलिए उसे अब रिहा किया जाना चाहिए। सोमवार, 27 जुलाई 2026 को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की।

अबू सलेम की तरफ से सीनियर एडवोकेट Rishi Malhotra ने दलील दी कि जेल अधिकारियों ने उसे अंडरट्रायल (विचाराधीन कैदी) के तौर पर बिताए गए समय का पूरा फायदा नहीं दिया है। वकील ने कहा कि TADA कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद यह लाभ नहीं मिला। सलेम का तर्क है कि अगर उसकी रिहाई के लिए रिमिशन और अंडरट्रायल समय को जोड़ा जाए, तो वह 25 साल की सीमा पार कर चुका है। सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने सलेम की सजा की सटीक गणितीय गणना (mathematical calculation) पर स्पष्टीकरण मांगा।

अदालत ने Abu Salem को एक हफ्ते के भीतर लिखित दलीलें और संबंधित फैसले जमा करने की अनुमति दी है। यह पूरा मामला पुर्तगाल के साथ भारत के प्रत्यर्पण समझौते (extradition treaty) से जुड़ा है। भारत ने 17 दिसंबर 2002 को पुर्तगाल को भरोसा दिया था कि सलेम को मौत की सजा नहीं दी जाएगी और उसकी कैद 25 साल से ज्यादा नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2022 में भी कहा था कि केंद्र सरकार इस वादे को निभाने के लिए राष्ट्रपति को सलाह दे सकती है।

दूसरी तरफ, Bombay High Court ने जुलाई 2025 और अप्रैल 2026 में सलेम की रिहाई की याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने तब कहा था कि 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी। महाराष्ट्र सरकार का भी यही पक्ष रहा है कि सलेम ‘कैटेगरी 8’ का कैदी है और उसे 60 साल की सजा काटनी होगी। सरकार के मुताबिक, प्रत्यर्पण समझौते में जिक्र किए गए 25 साल का मतलब ‘वास्तविक कारावास’ है, जिसमें रिमिशन शामिल नहीं है।