UP : गाजियाबाद में एक 4 साल की बच्ची के साथ हुए रेप और मर्डर केस में पुलिस की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस के रवैये को पूरी तरह से असंवेदनशील और उदासीन बताया। मामले की गंभीरता को देखत
UP : गाजियाबाद में एक 4 साल की बच्ची के साथ हुए रेप और मर्डर केस में पुलिस की लापरवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराजगी जताई है। कोर्ट ने पुलिस के रवैये को पूरी तरह से असंवेदनशील और उदासीन बताया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने गाजियाबाद के पुलिस कमिश्नर और नंदग्राम थाने के SHO को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।
पुलिस की किन गलतियों पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी?
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें CJI सूर्या कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल थे, ने जांच में कई बड़ी कमियां पकड़ीं। कोर्ट ने पाया कि पुलिस ने शुरुआत में FIR में रेप की धाराओं और POCSO एक्ट को शामिल नहीं किया था, जबकि केवल हत्या की धाराओं पर ध्यान दिया गया। इसके अलावा, स्पॉट रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी यौन शोषण के संकेतों को ठीक से दर्ज नहीं किया गया था।
केस की अब तक की मुख्य जानकारी क्या है?
| विवरण |
तारीख/जानकारी |
| घटना की तारीख |
16 मार्च, 2026 |
| FIR दर्ज होने की तारीख |
17 मार्च, 2026 |
| आरोपी की गिरफ्तारी |
18 मार्च, 2026 |
| अगली सुनवाई |
13 अप्रैल, 2026 |
| आरोपी कौन है |
पड़ोसी, जिसने बच्ची को बहलाया था |
पीड़ित परिवार के आरोप और कोर्ट के निर्देश
बच्ची के पिता ने कोर्ट में आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके परिवार को लॉकअप में रखकर मारपीट की और उन्हें चुप रहने को कहा। उन्होंने यह भी बताया कि दो प्राइवेट अस्पतालों ने घायल बच्ची को भर्ती करने और इलाज देने से मना कर दिया था। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया है कि पीड़ित परिवार या गवाहों के खिलाफ कोई दमनकारी कार्रवाई नहीं होगी। साथ ही, उन दो अस्पतालों को भी नोटिस जारी किया गया है। कोर्ट ने इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए SIT या किसी केंद्रीय एजेंसी की जरूरत पर सहमति जताई है।