UP : महर्षि महेश योगी द्वारा बनाई गई Spiritual Regeneration Movement Foundation of India (SRMFI) की जमीनों की कथित अवैध बिक्री के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक
UP : महर्षि महेश योगी द्वारा बनाई गई Spiritual Regeneration Movement Foundation of India (SRMFI) की जमीनों की कथित अवैध बिक्री के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने का आदेश दिया है। यह आदेश नोएडा के सेक्टर 39 पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR से जुड़ी अपील पर सुनवाई के दौरान आया।
SIT जांच में क्या-क्या होगा और कौन करेगा निगरानी
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि SIT का गठन उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव (Chief Secretary) की निगरानी में होगा और इसमें रजिस्ट्रार ऑफ सोसाइटीज भी सदस्य रहेंगे। SIT को तीन महीने के भीतर अपनी फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट पेश करनी होगी। टीम की मुख्य जिम्मेदारी SRMFI की सभी जमीनों की पहचान करना, बिना अनुमति के हुए ट्रांसफर की जांच करना और उन जमीनों का पता लगाना है जिन्हें मूल पदाधिकारियों के अलावा किसी और ने बेचा है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को क्यों हटाया गया
इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश दिया था, जिसमें FIR से जुड़ी चार्जशीट दाखिल करने पर रोक लगा दी गई थी। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने इस आदेश को पूरी तरह गलत बताते हुए हटा दिया। कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट दंडात्मक कार्रवाई को रोक सकते हैं, लेकिन जांच के दौरान चार्जशीट दाखिल करने पर पूरी तरह रोक लगाना सही नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह सोसाइटी जन कल्याण के लिए बनी थी, न कि महर्षि महेश योगी की मृत्यु के बाद कुछ लोग इसकी जमीनों का व्यापार करें।
आरोपियों पर क्या होगा असर और आगे की कार्रवाई
कोर्ट ने निर्देश दिया है कि अगर SIT की जांच में धोखाधड़ी और आपराधिक मंशा पाई जाती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, जब तक SIT अपनी रिपोर्ट जमा नहीं कर देती और जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक आरोपियों के खिलाफ कोई कठोर कदम (Coercive Action) नहीं उठाया जाएगा, बशर्ते सभी आरोपी जांच में पूरा सहयोग करें। इस मामले में श्रीकांत ओझा ने याचिका दायर की थी और उनकी तरफ से एडवोकेट हेमंत शाह पेश हुए थे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
SIT को अपनी रिपोर्ट कितने समय में देनी है?
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि SIT को इस पूरे मामले की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट तीन महीने के भीतर जमा करनी होगी।
यह मामला किस पुलिस स्टेशन से जुड़ा है?
यह मामला नोएडा के सेक्टर 39 पुलिस स्टेशन में साल 2025 में दर्ज की गई एक FIR से संबंधित है।