Delhi: दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियमित नि
Delhi: दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियमित नियुक्तियां क्यों नहीं की गईं। यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) के बाद सामने आया है, जिसकी अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी।
DERC में नियुक्तियों को लेकर क्या है पूरा विवाद?
NGO ‘एनर्जी वॉचडॉग’ ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि DERC में अध्यक्ष और सदस्यों के नियमित पदों पर भर्ती नहीं हुई है। वर्तमान में यहां केवल दो अस्थायी (प्रो-टेम) सदस्य काम कर रहे हैं। बिजली अधिनियम 2003 के नियमों के मुताबिक, आयोग में एक कानून का जानकार व्यक्ति होना जरूरी है, लेकिन अभी ऐसी कोई नियुक्ति नहीं है। वकील प्रणव सचदेवा ने कोर्ट को बताया कि इस कमी की वजह से आयोग अपने न्यायिक काम ठीक से नहीं कर पा रहा है।
आम जनता और बिजली उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ रहा है?
याचिका में यह बात उठाई गई है कि नियमित नियुक्तियां न होने से आम लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। आरोप है कि बिजली कंपनियों (DISCOMs) के खिलाफ 15 जुलाई 2025 से शिकायतों की सुनवाई या लिस्टिंग नहीं की गई है। इससे उपभोक्ताओं के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है और उन्हें अपनी शिकायतों के लिए भटकना पड़ रहा है।
कोर्ट ने अब तक क्या आदेश दिए हैं?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली सरकार को नोटिस भेजा है। साल 2025 में दिल्ली सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया था कि नियुक्तियों की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी, लेकिन याचिकाकर्ता के अनुसार वह वादा पूरा नहीं हुआ। अब कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और मामले को अगले सप्ताह के लिए तय किया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
DERC क्या है और इसमें क्या समस्या है?
DERC दिल्ली की बिजली नियामक संस्था है। समस्या यह है कि यहाँ अध्यक्ष और नियमित सदस्यों के पद खाली हैं और कानून का जानकार कोई सदस्य नहीं है, जिससे कानूनी काम रुके हुए हैं।
उपभोक्ताओं को इससे क्या परेशानी हो रही है?
नियमित नियुक्तियों की कमी के कारण बिजली कंपनियों (DISCOMs) के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई 15 जुलाई 2025 से रुकी हुई है, जिससे लोगों को न्याय मिलने में देरी हो रही है।