Delhi: दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियमित नियुक्तियों में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को कोर्ट ने इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई की और दिल्ली सरकार से जवाब
Delhi: दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियमित नियुक्तियों में हो रही देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को कोर्ट ने इस मामले में एक याचिका पर सुनवाई की और दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला बिजली नियामक संस्था में स्थाई अधिकारियों की नियुक्ति से जुड़ा है, जिससे राजधानी की बिजली व्यवस्था और नियमों पर असर पड़ता है।
DERC नियुक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि नियुक्तियों में देरी क्यों हो रही है। दरअसल, DERC के चेयरमैन और सदस्यों की नियमित भर्ती के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी, जिस पर अब सरकार को अपना पक्ष रखना होगा।
अब तक क्या रहा पूरा मामला?
DERC में नियुक्तियों को लेकर दिल्ली सरकार और LG ऑफिस के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। पहले कोर्ट ने जस्टिस जयंत नाथ को अंतरिम अध्यक्ष बनाया था, जिनका कार्यकाल 65 साल की उम्र के बाद भी बढ़ाया गया था। बाद में जस्टिस उमेश कुमार को केंद्र और दिल्ली सरकार की सहमति से अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिन्होंने 25 मार्च 2025 को शपथ ली। हालांकि, अन्य सदस्यों की नियमित नियुक्ति का मुद्दा अब भी कोर्ट में लंबित है और इस पर 5 जजों की संविधान पीठ का फैसला भी आना बाकी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
DERC क्या है और यह क्यों जरूरी है?
DERC यानी दिल्ली विद्युत नियामक आयोग वह संस्था है जो दिल्ली में बिजली की दरों और नियमों को तय करती है। इसकी सही ढंग से कार्यप्रणाली के लिए नियमित अध्यक्ष और सदस्यों का होना जरूरी है।
वर्तमान में DERC का अध्यक्ष कौन है?
मार्च 2025 में जस्टिस (रिटायर्ड) उमेश कुमार ने DERC के अध्यक्ष के रूप में शपथ ली थी।