Delhi: अगर आपने अपने घर या रिहायशी इलाके की प्रॉपर्टी को दुकान, ऑफिस या कोचिंग सेंटर बना रखा है, तो अब आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। Supreme Court ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में रिहायशी म
Delhi: अगर आपने अपने घर या रिहायशी इलाके की प्रॉपर्टी को दुकान, ऑफिस या कोचिंग सेंटर बना रखा है, तो अब आप मुश्किल में पड़ सकते हैं। Supreme Court ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में रिहायशी मकानों के कमर्शियल इस्तेमाल की जांच करने का आदेश दिया है। इसी आदेश के बाद MCD ने दिल्ली में बड़े स्तर पर सर्वे शुरू कर दिया है।
MCD का सर्वे और जांच कैसे होगी?
MCD कमिश्नर Sanjeev Khirwar ने दिल्ली के सभी 12 जोनल डिप्टी कमिश्नरों को समय सीमा के अंदर सर्वे पूरा करने को कहा है। यह सर्वे अधिकृत कॉलोनियों, अनधिकृत कॉलोनियों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों और प्लॉटेड डेवलपमेंट्स समेत सभी रिहायशी इलाकों में होगा। फील्ड टीमें मौके पर जाकर जांच करेंगी कि किन मकानों में दुकान, ऑफिस, गोदाम या गेस्ट हाउस चल रहे हैं। गलत जानकारी देने या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी।
Supreme Court के निर्देश और अगली सुनवाई
यह पूरा मामला Loganathan बनाम तमिलनाडु राज्य के केस से जुड़ा है, जिसमें जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने दखल दिया। कोर्ट ने कहा कि रिहायशी इलाकों को कमर्शियल जोन में बदलने से पर्यावरण और नागरिक सुविधाओं पर बुरा असर पड़ता है। सभी नगर निगमों को अपने कमिश्नर के जरिए हलफनामा जमा करना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई 20 मई 2026 को होगी, जबकि जयपुर नगर निगम को 15 मई तक अपनी रिपोर्ट देनी थी।
आम जनता और व्यापारियों पर क्या होगा असर?
दिल्ली के व्यापारी संगठनों ने इस सर्वे को लेकर चिंता जताई है और MCD से स्पष्टता मांगी है। दूसरी ओर, दिल्ली बीजेपी प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि पूरे शहर का सर्वे करने के लिए दिया गया समय बहुत कम है। जयपुर के पूर्व एडिशनल चीफ टाउन प्लानर चंद्र शेखर पाराशर ने बताया कि नियमों की अनदेखी के कारण जयपुर में भी रिहायशी इलाकों में काफी व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिससे तय कमर्शियल हब का महत्व कम हो रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MCD का सर्वे किन इलाकों में किया जाएगा?
यह सर्वे दिल्ली की सभी अधिकृत, अनधिकृत, नियमित कॉलोनियों, ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों और प्लॉटेड डेवलपमेंट्स में किया जाएगा ताकि रिहायशी मकानों के व्यावसायिक इस्तेमाल की पहचान हो सके।
Supreme Court में इस मामले की अगली सुनवाई कब है?
इस मामले की अगली सुनवाई 20 मई 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें नगर निगमों को अपनी जांच रिपोर्ट हलफनामे के साथ पेश करनी होगी।