Delhi, UP, Haryana: यमुना नदी की बदहाली को देखते हुए Supreme Court ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि यमुना अब नदी नहीं बल्कि एक गंदे नाले जैसी बन गई है। इसे साफ करने के लिए अब Union Home Secretary की अध्यक्षता में ए
Delhi, UP, Haryana: यमुना नदी की बदहाली को देखते हुए Supreme Court ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि यमुना अब नदी नहीं बल्कि एक गंदे नाले जैसी बन गई है। इसे साफ करने के लिए अब Union Home Secretary की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाई गई है, जिसे अगले आठ हफ्तों में पूरा एक्शन प्लान तैयार करना होगा।
इस कमेटी में कौन-कौन शामिल होगा और क्या है जिम्मेदारी
Supreme Court के जस्टिस मनोज मिश्रा और मनमोहन ने इस पैनल का गठन किया है। इसमें Union Home Secretary के साथ-साथ उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के Chief Secretaries शामिल होंगे जहाँ से यमुना बहती है। इसमें Delhi, UP, Haryana, Uttarakhand और Himachal Pradesh के अधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रमुख होंगे। साथ ही, Amicus Curiae के तौर पर सीनियर एडवोकेट K Parmeshwar भी इस टीम का हिस्सा रहेंगे।
नदी को साफ करने के लिए क्या कड़े कदम उठाए जाएंगे
कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा और कुछ कड़े फैसले लेने होंगे। इसमें नदी के किनारे हुए अवैध कब्जों को हटाना, गैरकानूनी फैक्ट्रियों को बंद करना और अनधिकृत कॉलोनियों को वहां से हटाना शामिल है। कोर्ट ने पाया कि अलग-अलग एजेंसियां आपस में तालमेल नहीं बिठा पा रही हैं, जिसकी वजह से सीवेज और ड्रेनेज सिस्टम सही से काम नहीं कर रहे हैं।
नोएडा और दिल्ली की वर्तमान स्थिति क्या है
रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा के 8 में से केवल 3 Sewage Treatment Plants (STPs) ही नियमों का पालन कर रहे हैं, जिससे गंदा पानी सीधे यमुना में जा रहा है। वहीं, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2028 तक यमुना को साफ करने का लक्ष्य रखा है। UP सरकार भी ‘नमामि गंगे’ के तहत 83 STPs का संचालन कर रही है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी राज्यों को एक साथ मिलकर काम करने का आदेश दिया है और अगली सुनवाई 8 अगस्त 2026 को तय की है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
यमुना की सफाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया है?
कोर्ट ने Union Home Secretary की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई है जिसे 8 हफ्ते में सफाई का एक्शन प्लान तैयार करना है। इसमें अवैध निर्माण हटाने और फैक्ट्रियों को बंद करने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे।
इस पैनल में कौन से राज्य शामिल हैं?
इस पैनल में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी शामिल होंगे।