Rajasthan, Haryana, Delhi: अरावली की पहाड़ियों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने अरावली की परिभाषा की दोबारा जांच करने के लिए पांच सदस्यों की एक हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाई है। इस फैसले क
Rajasthan, Haryana, Delhi: अरावली की पहाड़ियों को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा कदम उठाया है। कोर्ट ने अरावली की परिभाषा की दोबारा जांच करने के लिए पांच सदस्यों की एक हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी बनाई है। इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो इस इलाके में माइनिंग कर रहे हैं, क्योंकि फिलहाल पूरे क्षेत्र में खनन गतिविधियों पर रोक लगा दी गई है।
एक्सपर्ट कमेटी क्या जांच करेगी और इसके नियम क्या हैं?
यह कमेटी इस बात की जांच करेगी कि क्या 100 मीटर से ऊंची पहाड़ियां एक निरंतर इकोलॉजिकल एरिया बनाती हैं, भले ही उनके बीच की दूरी 500 मीटर से ज्यादा हो। कोर्ट को डर है कि अगर परिभाषा को सिर्फ 500 मीटर के दायरे तक सीमित रखा गया, तो बहुत बड़ा इलाका असुरक्षित हो जाएगा और वहां अवैध माइनिंग बढ़ जाएगी। कमेटी यह भी देखेगी कि क्या राजस्थान की 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 पहाड़ियां ही 100 मीटर की ऊंचाई वाली हैं, क्योंकि इससे बाकी पहाड़ियां बिना किसी सुरक्षा के रह जाएंगी।
कमेटी में कौन शामिल है और रिपोर्ट कब आएगी?
इस कमेटी की अध्यक्षता ICFRE की महानिदेशक कंचन देवी कर रही हैं। इसमें डॉ. सुभाष आशुतोष, डॉ. राजेंद्र कुमार शर्मा, बृज मोहन सिंह राठौर और प्रोफेसर अशोक के. भटनागर सदस्य के तौर पर शामिल हैं। कमेटी को 31 अगस्त 2026 तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में सौंपनी होगी। इसके बाद 7 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई करेगा। रिपोर्ट तैयार करने के लिए कमेटी दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा सरकार के साथ-साथ पर्यावरणविदों और स्थानीय ग्रामीणों से भी बात करेगी।
माइनिंग पर रोक का आम लोगों और ठेकेदारों पर क्या असर होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि जब तक फाइनल रिपोर्ट नहीं आ जाती और उस पर विचार नहीं हो जाता, तब तक अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह की माइनिंग की अनुमति नहीं होगी। इसका मतलब है कि अब कोई नया लीज नहीं दिया जाएगा और न ही पुराने लीज का रिन्यूअल होगा। यह फैसला पर्यावरण को बचाने के लिए लिया गया है ताकि अरावली की पहाड़ियों का और ज्यादा कटाव न हो और स्थानीय इकोसिस्टम सुरक्षित रहे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अरावली माइनिंग पर सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला आया है?
सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा की दोबारा जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई है और जब तक रिपोर्ट नहीं आती, तब तक पूरे क्षेत्र में माइनिंग गतिविधियों और नए लीज पर रोक लगा दी है।
एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट कब तक आएगी?
हाई-पावर्ड एक्सपर्ट कमेटी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट 31 अगस्त 2026 तक जमा करनी है, जिसके बाद 7 सितंबर 2026 को कोर्ट में अगली सुनवाई होगी।