अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली और UP समेत कई राज्यों से मांगी रिपोर्ट; अधिकारियों को व्यक्तिगत पेश होने का आदेश
Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने देश में हो रहे अवैध निर्माण और इसमें सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और तमिलनाडु जैसे राज्यों से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मा
Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने देश में हो रहे अवैध निर्माण और इसमें सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार और तमिलनाडु जैसे राज्यों से इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर नियमों की अनदेखी हुई है, तो लापरवाह अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।
अदालत ने दिल्ली के लाजपत नगर, साकेत और सरोजिनी नगर जैसे इलाकों में हुए अवैध निर्माणों का विशेष जिक्र किया। कोर्ट ने मालवीय नगर में लगी आग और साकेत में इमारत गिरने जैसी घटनाओं पर चिंता जताई। साथ ही लखनऊ के अलीगंज में आग लगने की घटना का भी उल्लेख किया गया, जिसमें 15 लोगों की जान चली गई थी। गुरुग्राम में अग्नि सुरक्षा ऑडिट के दौरान 93% प्रतिष्ठानों के फेल होने पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं:
- साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर के जमीनी सर्वे के लिए IIT Delhi के प्रोफेसरों और ड्राफ्ट्समैन की एक विशेष टीम बनाई जाएगी।
- सरोजिनी नगर इलाके का सर्वे NDMC के अधिकार क्षेत्र में किया जाएगा।
- गुरुग्राम विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और लखनऊ नगर निगम के आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया गया है।
- अगली सुनवाई 4 अगस्त 2026 को होगी।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने चेतावनी दी है कि यदि अगली सुनवाई तक रिपोर्ट दाखिल नहीं हुई या निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों के आयुक्तों और सीईओ के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जाएगी। यह मामला देशभर में असुरक्षित और बिना अनुमति बनी इमारतों से जुड़ा है, जिससे आम लोगों की जान को खतरा बना रहता है।