Delhi के जंतर मंतर पर छात्रों का फिर प्रदर्शन, हिरासत में लिए विद्यार्थियों की रिहाई की मांग
Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर बुधवार, 29 जुलाई 2026 को लेफ्ट समर्थित छात्र संगठनों ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन किया। AISA, SFI और JNUSU जैसे संगठनों ने इस प्रदर्शन के जरिए हिरासत में लिए गए छात्रों को तुरंत रिहा
Delhi: राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर बुधवार, 29 जुलाई 2026 को लेफ्ट समर्थित छात्र संगठनों ने एक बार फिर विरोध प्रदर्शन किया। AISA, SFI और JNUSU जैसे संगठनों ने इस प्रदर्शन के जरिए हिरासत में लिए गए छात्रों को तुरंत रिहा करने और छात्र आंदोलनों के खिलाफ हो रहे ‘क्रिमिनलाइजेशन’ को रोकने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बर्बरता के आरोप लगाए और कहा कि हालिया प्रदर्शनों के दौरान छात्रों को काफी चोटें आईं।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान DISHA के एक कार्यकर्ता ने Cockroach Janta Party (CJP) से अपील की कि वे एक बार फिर छात्रों को इकट्ठा होने का आह्वान करें। उनका कहना था कि यदि CJP बुलाती है, तो छात्र वापस लौट आएंगे और इस आंदोलन को फिर से जीवित किया जा सकता है। गौरतलब है कि पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई 2026 को CJP का महीने भर चलने वाला आंदोलन आधिकारिक तौर पर समाप्त हो गया था।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने 28 और 29 जुलाई को इस मामले में अहम अंतरिम आदेश जारी किए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी नाबालिगों और बिना किसी आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए। कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए, हालांकि यह राहत उन लोगों के लिए नहीं है जिनका आपराधिक इतिहास रहा है।
चीफ जस्टिस सूर्या कांत ने हिंसा की निष्पक्ष जांच की बात कही और कहा कि बिना जिम्मेदारी तय किए जांच का कोई मतलब नहीं है। कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों से इस मामले में जवाब मांगा है। वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से कहा कि सरकार को स्वतंत्र जांच में कोई आपत्ति नहीं है और जो भी छात्रों को नुकसान पहुंचाएंगे, उन्हें सजा मिलनी चाहिए।
छात्र कार्यकर्ताओं का आरोप है कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी कई राज्यों में पुलिस उनके घरों पर आकर उन्हें गिरफ्तार करने की धमकी दे रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि उनके कई सोशल मीडिया अकाउंट्स को अधिकारियों द्वारा ब्लॉक कर दिया गया है।