Strait of Hormuz में तनाव बढ़ा, ईरान ने रास्ता बंद करने का किया दावा; जहाजों के लिए अलर्ट जारी
World : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz में तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान ने इस जलमार्ग को बंद करने का दावा किया है, जबकि अमेरिका के नेतृत्व वाले Joint Maritime Information Center (JMIC)
World : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz में तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान ने इस जलमार्ग को बंद करने का दावा किया है, जबकि अमेरिका के नेतृत्व वाले Joint Maritime Information Center (JMIC) का कहना है कि दक्षिणी रास्ता अभी भी खुला है। इस बीच, जहाजों को वहां से गुजरते समय बेहद सावधान रहने की सलाह दी गई है क्योंकि सुरक्षा का खतरा ‘severe’ यानी गंभीर स्तर पर है।
ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने 12 जुलाई 2026 को ऐलान किया कि Strait of Hormuz को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। ईरान का कहना है कि उसने एक जहाज पर चेतावनी के लिए गोली चलाई क्योंकि वह गलत रास्ते का इस्तेमाल कर रहा था। ईरान ने अमेरिका द्वारा क्षेत्र में दखलंदाजी बंद करने की मांग की है। साथ ही, ईरान ने दूसरे जहाज पर हमला करने और कतर में अमेरिकी बेस को निशाना बनाने का दावा भी किया है।
इस तनाव का असर भारत पर भी पड़ा है। ओमान के पास एक जहाज पर हुए हमले के बाद भारत के 11 नागरिकों में से 10 को बचा लिया गया है, जबकि एक व्यक्ति अभी भी लापता है। उधर, अमेरिका ने 12 जुलाई को ईरान के खिलाफ अपने तीसरे दौर के हमले किए, जो Cyprus के झंडे वाले कंटेनर जहाज M/V GFS Galaxy पर हुए हमले का जवाब थे।
समुद्री सुरक्षा को लेकर जारी जानकारी इस प्रकार है:
| संस्था/देश | स्थिति/बयान |
|---|---|
| JMIC (अमेरिका नेतृत्व) | दक्षिणी रास्ता खुला है, कोई फीस या कंट्रोलिंग अथॉरिटी नहीं है। |
| ईरान (IRGC) | रास्ता बंद है, जब तक अमेरिकी दखल खत्म नहीं होता। |
| UKMTO | सुरक्षा खतरे का स्तर ‘Substantial’ से बढ़ाकर ‘Severe’ किया। |
| IMO | जहाज मालिकों को चेतावनी दी कि सुरक्षा सुनिश्चित न होने पर रास्ता न चुनें। |
| ओमान | ईरान के साथ सुरक्षित रास्ते के लिए बातचीत कर रहा है। |
| ऑस्ट्रेलिया | ईरान से युद्धविराम का पालन करने और रास्ता खोलने की अपील की। |
मई में अमेरिका और ईरान के बीच एक युद्धविराम समझौता हुआ था, लेकिन अब इन हमलों के बाद वह समझौता पूरी तरह टूट चुका है। हालांकि JMIC कह रहा है कि रास्ता खुला है, लेकिन असलियत में जहाजों की आवाजाही में भारी कमी आई है और कई कमर्शियल ऑपरेटर अब इस रास्ते का इस्तेमाल करने से डर रहे हैं।