South Delhi के IVF सेंटर में भ्रूण अदला-बदली का शक, जुड़वां बच्चियों के DNA टेस्ट की मांग
Delhi: साउथ दिल्ली के एक आईवीएफ सेंटर में भ्रूण अदला-बदली का गंभीर मामला सामने आया है। यहां इलाज कराने वाले एक दंपती को शक है कि उन्हें जो जुड़वां बच्चियां मिली हैं, वे उनके जैविक बच्चे नहीं हैं। अब इस मामले में बच्चियों
Delhi: साउथ दिल्ली के एक आईवीएफ सेंटर में भ्रूण अदला-बदली का गंभीर मामला सामने आया है। यहां इलाज कराने वाले एक दंपती को शक है कि उन्हें जो जुड़वां बच्चियां मिली हैं, वे उनके जैविक बच्चे नहीं हैं। अब इस मामले में बच्चियों के सिबलिंग डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि सच सामने आ सके।
मोहन गार्डन के रहने वाले राहुल और मीनू राठौर ने साल 2025 में ग्रेटर कैलाश पार्ट-1 स्थित SCI IVF अस्पताल में इलाज कराया था। 5 जनवरी 2026 को द्वारका के एक निजी अस्पताल में उनकी जुड़वां बच्चियां पैदा हुईं। जब दंपती ने देखा कि दोनों बच्चियों के चेहरे और रूप-रंग में काफी फर्क है, तो उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने जनवरी 2026 में डीएनए टेस्ट कराए, जिसमें यह बात सामने आई कि बच्चियां उनके जैविक माता-पिता से संबंधित नहीं थीं।
इस मामले में साकेत कोर्ट के आदेश के बाद 31 मार्च 2026 को एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने अप्रैल 2026 में एम्स (AIIMS) में दोनों बच्चियों के सिबलिंग डीएनए टेस्ट के लिए सैंपल लिए, जिन्हें जांच के लिए चाणक्यपुरी स्थित एफएसएल (FSL) भेजा गया है। दंपती का आरोप है कि दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग और यूटी एप्रोप्रिएट अथॉरिटी ने शिकायत के बावजूद जांच में ढिलाई बरती है।
वहीं, SCI IVF अस्पताल के डॉक्टरों, जिनमें डॉ. शिवानी सचदेव गौड़ और डॉ. विशाल गौड़ शामिल हैं, का दावा है कि दंपती ने डोनर भ्रूण के लिए सहमति दी थी। हालांकि, मां ने इस बात का पूरी तरह खंडन किया है। दंपती ने इसे मानव तस्करी का मामला बताते हुए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके दो और भ्रूण अभी भी उसी सेंटर में रखे हुए हैं, जिनकी जांच जरूरी है।
अब यह दंपती सोशल मीडिया के जरिए उन अन्य माता-पिता से भी संपर्क कर रहे हैं जिन्होंने इसी सेंटर में इलाज कराया था या जनवरी 2026 के आसपास द्वारका के अस्पताल में बच्चों को जन्म दिया था, ताकि वे भी अपने बच्चों का डीएनए टेस्ट करा सकें।